मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि सरकार ग्रांट-इन-एड से पांच करोड़ रुपए की बचत करेगी। यह ग्रांट राज्य सरकार को हर साल हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम को हिमाचल भवन और हिमाचल सदन दिल्ली, हिमाचल भवन चंडीगढ़ में ठहरने वाले विशिष्ट व्यक्तियों के खर्च के रूप में देती थी। अब प्रदेश सरकार ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति को प्रदर्शित करते हुए सभी विधायकों और अधिकारियों को आम जनता की श्रेणी में लाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पांच करोड़ रुपए की इस बचत को प्रदेश के आर्थिक विकास पर खर्च किया जाएगा। सरकार ने हिमाचल भवन और हिमाचल सदन, दिल्ली और हिमाचल भवन चंडीगढ़ में रहने पर मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के लिए किराए के कमरों की दर एक समान 1200 रुपए प्रतिदिन कर दी है। इस निर्णय का हालांकि कुछ विधायक और अधिकारी विरोध कर रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री ने उनकी सलाह को नजरअंदाज करते हुए सभी का एक समान 1200 रुपए किराया निर्धारित कर दिया है।
मुख्यमंत्री का तर्क है कि जब आम लोग 1200 रुपए किराया अदा कर सकते हैं, तो विधायक और अधिकारी क्यों नहीं। वर्तमान सरकार के इस निर्णय से सरकारी खजाने का बोझ भी कम होगा। मुख्यमंत्री कई मौकों पर कह चुके हैं कि हम सत्ता सुख के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए आए हैं। मुख्यमंत्री ने अनेक महत्वाकांक्षी निर्णय लेकर इस सोच को चिरतार्थ किया है।