हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने की तैयारी, कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार पर सरकार सक्रिय

Update: 2026-07-29 09:46 GMT

शिमला। हिमाचल प्रदेश में हवाई संपर्क और एयरपोर्ट विस्तार से जुड़े मुद्दे को राज्यसभा में उठाया गया है। भाजपा सांसद हर्ष महाजन के सवाल पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार के लिए 369.82 एकड़ अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस भूमि को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है और अभी तक यह जमीन एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को हस्तांतरित नहीं की गई है।

केंद्रीय मंत्री ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश में हवाई सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रदेश में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एयरपोर्ट सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। इसी दिशा में कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार की योजना तैयार की गई है, लेकिन भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण परियोजना आगे बढ़ने में देरी हो रही है।

उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने हिमाचल सरकार के अनुरोध पर कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार की योजना तैयार कर ली है। इसके लिए कुल 369.82 एकड़ अतिरिक्त जमीन की जरूरत है। राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति-2016 के तहत एयरपोर्ट के विकास और विस्तार के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करवाना संबंधित राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है।

हर्ष महाजन ने संसद में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश में बेहतर हवाई संपर्क और आधुनिक परिवहन ढांचे के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा एयरपोर्ट का विस्तार प्रदेश के पर्यटन, व्यापार और आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में राज्य सरकार को जल्द से जल्द जमीन उपलब्ध करवाकर इस परियोजना को गति देनी चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने हिमाचल के अन्य एयरपोर्ट विस्तार की स्थिति के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कुल्लू-भुंतर एयरपोर्ट और शिमला एयरपोर्ट के विस्तार में भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। पहाड़ी इलाकों में कठिन भू-भाग, सीमित भूमि और तकनीकी बाधाओं के कारण इन एयरपोर्ट के विस्तार की संभावनाएं सीमित हैं।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के प्रमुख एयरपोर्ट से कई शहरों के लिए हवाई सेवाएं संचालित की जा रही हैं। शिमला एयरपोर्ट से दिल्ली और धर्मशाला के लिए उड़ानें उपलब्ध हैं। वहीं कांगड़ा स्थित गगल एयरपोर्ट से दिल्ली, जेवर, चंडीगढ़ और शिमला के लिए हवाई संपर्क मौजूद है। कुल्लू-भुंतर एयरपोर्ट अमृतसर, दिल्ली और जयपुर जैसे शहरों से जुड़ा हुआ है।

कांगड़ा एयरपोर्ट को हिमाचल प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण हवाई अड्डों में माना जाता है, क्योंकि यह धर्मशाला, मैक्लोडगंज और आसपास के पर्यटन क्षेत्रों के लिए मुख्य प्रवेश द्वार है। एयरपोर्ट के विस्तार से बड़े विमानों के संचालन की संभावना बढ़ेगी और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

स्थानीय स्तर पर भी लंबे समय से कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार की मांग उठती रही है। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि एयरपोर्ट के विस्तार से प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हालांकि, भूमि अधिग्रहण को लेकर कई बार स्थानीय स्तर पर चुनौतियां सामने आती रही हैं।

अब केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को आवश्यक भूमि उपलब्ध करानी होगी। अगर जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया जल्द पूरी होती है तो कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार परियोजना को गति मिल सकती है और हिमाचल प्रदेश की हवाई कनेक्टिविटी और मजबूत हो सकती है।

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