हिमाचल प्रदेश

25 साल बाद बेटे को मिलेगी अनुकंपा नौकरी

Saba Naaz
29 July 2026 2:51 PM IST
25 साल बाद बेटे को मिलेगी अनुकंपा नौकरी
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हिमाचल प्रदेश: हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर उसके परिवार को अनुकंपा आधार पर नौकरी के अधिकार की जानकारी देना नियोक्ता यानी संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहता है तो इसका नुकसान पीड़ित परिवार को नहीं उठाना चाहिए।

न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एकलपीठ ने इस मामले में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता नवीन कुमार को अनुकंपा आधार पर नौकरी प्रदान करे। कोर्ट ने विभाग द्वारा आवेदन खारिज करने के आदेश को रद्द करते हुए नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया है।

यह मामला करीब 25 साल पुराना है। याचिकाकर्ता नवीन कुमार के पिता अमर सिंह बीबीएमबी में सुंदरनगर में नियमित बेलदार के पद पर कार्यरत थे। 21 दिसंबर 2001 को नौकरी के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई थी। उस समय नवीन कुमार की उम्र केवल 13 वर्ष थी। परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर थी क्योंकि उनकी मां का निधन पहले ही हो चुका था। परिवार में नवीन के अलावा उनकी दो नाबालिग बहनें भी थीं।

पिता की मृत्यु के बाद नवीन कुमार नाबालिग होने के कारण तत्काल नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सके। जब वह बालिग हुए तो उन्होंने वर्ष 2016 में अनुकंपा आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन किया। हालांकि, विभाग ने लंबे समय बीत जाने का हवाला देते हुए उनके आवेदन को स्वीकार नहीं किया।

बीबीएमबी ने 24 जून 2025 को आदेश जारी कर नवीन कुमार का आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाना चाहिए था। विभाग की नीति के अनुसार आवेदन अधिकतम दो साल के अंदर किया जाना जरूरी था, जबकि नवीन कुमार ने कई वर्षों बाद आवेदन किया था।

इसके बाद नवीन कुमार ने विभाग के फैसले को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने विभाग के तर्कों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के समय परिवार की स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है। उस समय नवीन कुमार नाबालिग थे और उनके परिवार को अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार की जानकारी नहीं थी।

हाई कोर्ट ने कहा कि सरकारी विभाग या नियोक्ता की जिम्मेदारी होती है कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को मिलने वाले अधिकारों की जानकारी उपलब्ध कराए। यदि विभाग ऐसा नहीं करता है तो बाद में परिवार को जानकारी के अभाव का नुकसान नहीं उठाना चाहिए।

अदालत ने कहा कि केवल समय बीत जाने के आधार पर किसी जरूरतमंद परिवार के अधिकार को खत्म नहीं किया जा सकता। खासकर तब जब परिवार में मृत कर्मचारी के बच्चे नाबालिग हों और उन्हें कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं हो।

हाई कोर्ट ने बीबीएमबी के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें नवीन कुमार की अनुकंपा नियुक्ति की मांग खारिज की गई थी। कोर्ट ने विभाग को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की शैक्षणिक योग्यता और उसके पिता के पद को ध्यान में रखते हुए उसे जल्द से जल्द नियुक्ति पत्र जारी किया जाए।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नियुक्ति का लाभ उस तारीख से प्रभावी माना जाएगा, जब नवीन कुमार ने पहली बार हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस फैसले को अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें नियोक्ता की जिम्मेदारी को स्पष्ट किया गया है।

इस फैसले से उन परिवारों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जो कर्मचारी की मृत्यु के बाद जानकारी के अभाव या परिस्थितियों के कारण समय पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं कर पाए। कोर्ट की टिप्पणी से यह संदेश गया है कि सरकारी विभागों को केवल नियमों का हवाला देने के बजाय मानवीय पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा।

हिमाचल हाई कोर्ट के इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि अनुकंपा नियुक्ति केवल समय सीमा का मामला नहीं है, बल्कि जरूरतमंद परिवार को सहायता देने की व्यवस्था है। विभागों की जिम्मेदारी है कि वे प्रभावित परिवारों को उनके अधिकारों की जानकारी दें और प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाएं।

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