शिमला के सेब बागवान परेशान, मजदूरों की बढ़ी दिहाड़ी से बिगड़ा बजट

सेब बागवानों को झटका, मजदूरी बढ़ने से पैकिंग और तुड़ान की लागत में होगा इजाफा

Update: 2026-07-28 02:51 GMT

Shimla: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में सेब बागवानों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। सेब सीजन शुरू होने से पहले ही बागवानों को तुड़ान (सेब तोड़ने) और पैकिंग के लिए मजदूरों की बढ़ती दिहाड़ी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर मजदूर ₹900 तक प्रतिदिन की मजदूरी की मांग कर रहे हैं, जिससे बागवानों की उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका है।

सेब उत्पादन में तुड़ान, छंटाई, पैकिंग और मंडी तक पहुंचाने का काम सबसे महत्वपूर्ण चरणों में शामिल होता है। इस दौरान बड़ी संख्या में कुशल मजदूरों की जरूरत पड़ती है। लेकिन इस बार मजदूरी दरों में बढ़ोतरी से छोटे और मध्यम बागवानों की चिंता बढ़ गई है।
बागवानों का कहना है कि पहले ही खाद, कीटनाशक, पैकेजिंग सामग्री, परिवहन और अन्य कृषि खर्चों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में मजदूरी बढ़ने से सेब की कुल लागत और बढ़ जाएगी। उन्हें चिंता है कि यदि बाजार में उचित दाम नहीं मिले तो मुनाफा प्रभावित हो सकता है।
दूसरी ओर, मजदूरों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में काम कठिन होता है और सेब तुड़ान के दौरान जोखिम भी रहता है। मौसम की चुनौती, ऊंचाई वाले इलाकों में काम और सीमित सीजन को देखते हुए वे बेहतर मजदूरी की मांग कर रहे हैं।
सेब कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि मजदूरों की उपलब्धता और बढ़ती लागत आने वाले सीजन में बड़ा मुद्दा बन सकती है। कई बागवान अब स्थानीय स्तर पर श्रमिकों की व्यवस्था करने के साथ-साथ वैकल्पिक तरीकों पर भी विचार कर रहे हैं।
शिमला और आसपास के सेब उत्पादक क्षेत्रों में सीजन के दौरान हजारों परिवारों की आजीविका इस कारोबार से जुड़ी होती है। ऐसे में मजदूरी दरों और उत्पादन लागत के बीच संतुलन बनाना बागवानों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
प्रशासन और बागवानी विभाग से जुड़े अधिकारी भी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। बागवानों को उम्मीद है कि सरकार ऐसी व्यवस्था बनाएगी जिससे मजदूरों को उचित मेहनताना मिले और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी न पड़े।

Tags:    

Similar News