NGT के फ्रेमवर्क के तहत आयोजित होगी मणिमहेश यात्रा 2026

Update: 2026-05-08 07:16 GMT
Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: राज्य में श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय मणिमहेश यात्रा 2026 के आयोजन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त पर्यावरणीय फ्रेमवर्क जारी किया है। इस वर्ष यात्रा में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी। यात्रा 7 से 10 अगस्त 2026 तक मणिमहेश झील तक श्रद्धालुओं के लिए आयोजित की जाएगी। NGT के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यात्रा स्थल पर कचरा प्रबंधन, जल संसाधनों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण को सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। स्थानीय प्रशासन ने भी कहा है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्रा की सहज व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि मणिमहेश जैसी पर्वतीय यात्राएं प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डालती हैं। इसलिए NGT का सख्त फ्रेमवर्क इस बात को सुनिश्चित करेगा कि यात्रा के दौरान पारिस्थितिकी और जैव विविधता को नुकसान न पहुंचे। अधिकारियों के अनुसार, यात्रा मार्ग पर निर्धारित स्थानों पर ही श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन करने की अनुमति होगी। साथ ही, प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट सामग्री को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। यात्रा के आयोजन की जिम्मेदारी हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग और स्थानीय पंचायतों को दी गई है। उन्होंने बताया कि यात्रा के मार्ग पर सुरक्षा, प्राथमिक चिकित्सा और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा, पर्यावरण सुरक्षा के लिए स्थानीय युवा समूहों और स्वयंसेवी संगठनों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि प्रत्येक श्रद्धालु पर्यावरण नियमों का पालन करे।
NGT के अनुसार, यात्रा के दौरान जंगलों और झील के किनारे अवैध निर्माण, आग लगाना या किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होना चाहिए। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, यात्रा की निगरानी के लिए ड्रोन और अन्य तकनीकी साधनों का उपयोग किया जाएगा। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि यात्रा के लिए आवश्यक परमिट और मार्गदर्शन ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध होंगे, ताकि भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। यात्रा के आयोजन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा। होटल, लॉज, भोजनालय और स्थानीय हस्तशिल्प उद्योग को श्रद्धालुओं के आने से आर्थिक मदद मिलेगी। अधिकारियों ने कहा कि सभी व्यापारियों और स्थानीय लोगों को पर्यावरण नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
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