Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के छात्रों ने खेती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को जोड़कर सेब की कटाई में एक नई क्रांति ला दी है। इस नवाचार ने न केवल किसानों के लिए समय और मेहनत बचाई है, बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा में भी सुधार किया है।
जानकारी के अनुसार, छात्रों ने AI तकनीक आधारित स्मार्ट डिवाइस और सॉफ़्टवेयर का निर्माण किया, जो सेब के पेड़ों में पकने वाले फलों की पहचान करता है। इसके आधार पर कटाई का सही समय निर्धारित किया जा सकता है और खराब फलों को अलग किया जा सकता है। इस तकनीक से किसानों को मेहनत कम करनी पड़ती है और फल नुकसान से बचते हैं।
कुल्लू के कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि यह नवाचार पारंपरिक तरीके की तुलना में अधिक सटीक और तेज है। इससे न केवल समय की बचत होती है बल्कि उत्पादन भी बढ़ता है। पहले किसान अनुमान लगाकर कटाई करते थे, जिससे कई बार फल गिर जाते थे या खराब हो जाते थे। अब AI की मदद से यह समस्या खत्म हो गई है।
स्थानीय किसानों ने छात्रों के इस नवाचार की प्रशंसा की। उनका कहना है कि इस तकनीक से उनकी आय बढ़ेगी और मेहनत कम होगी। कई किसान अब इस तकनीक को अपने खेतों में अपनाने की योजना बना रहे हैं।
छात्रों ने बताया कि उन्होंने यह परियोजना कुल्लू के कृषि और विज्ञान कॉलेज के सहयोग से विकसित की। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल तकनीकी नवाचार करना नहीं, बल्कि इसे ऐसे तरीके से लागू करना था जिससे वास्तविक किसानों के जीवन में सुधार हो।
राज्य सरकार और कृषि विभाग ने भी इस पहल की सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे नवाचार हिमाचल के कृषि क्षेत्र को और अधिक विकसित और स्मार्ट बनाने में मदद करेंगे। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे इस तकनीक को अपनाएँ और कृषि उत्पादन को बढ़ाएँ।
विशेषज्ञों का कहना है कि कुल्लू के छात्रों का यह मॉडल पूरे राज्य और देश में अन्य फल उत्पादक क्षेत्रों के लिए उदाहरण बन सकता है। इससे किसानों की आय में सुधार, कृषि उत्पादन में वृद्धि और तकनीकी दक्षता बढ़ेगी।