शिमला। हिमाचल प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्रियों के विभागों में संभावित फेरबदल को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी राजनीतिक हलचल फिलहाल थमती दिखाई दे रही है। शुक्रवार को प्रस्तावित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक स्थगित होने और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अस्वस्थ रहने के कारण इस संबंध में कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया जा सका। अब कांग्रेस हाईकमान के रुख और मुख्यमंत्री की ओर से भेजी जाने वाली रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

कैबिनेट की बैठक टलने के बावजूद शुक्रवार को कई वरिष्ठ मंत्री सचिवालय पहुंचे। कृषि मंत्री चंद्र कुमार, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह सचिवालय में मौजूद रहे। मंत्रियों की उपस्थिति को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं चलती रहीं, लेकिन किसी भी स्तर पर मंत्रिमंडल विस्तार या विभागों में बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई।

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान दोपहर बाद निजी कार्य से फिर दिल्ली रवाना हो गए। उनकी दिल्ली यात्रा को लेकर भी अटकलें लगाई गईं, हालांकि इसे निजी कार्यक्रम बताया गया है। पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस नेताओं की राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी हाईकमान के साथ हुई बैठकों के कारण मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की प्रत्येक दिल्ली यात्रा को संभावित राजनीतिक बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अस्वस्थ होने के कारण शुक्रवार को सरकारी आवास ओकओवर में ही रहे। उन्होंने वहीं से प्रशासनिक कामकाज संभाला और अधिकारियों के साथ बैठक करके आवश्यक फाइलों का निपटारा किया। मुख्यमंत्री की अस्वस्थता के कारण भी प्रस्तावित कैबिनेट बैठक स्थगित किए जाने की बात सामने आई है। नई बैठक कब आयोजित होगी, इसे लेकर आधिकारिक कार्यक्रम की प्रतीक्षा की जा रही है।

राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा लंबे समय से चल रही है। सरकार में रिक्त स्थानों को भरने के साथ क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन स्थापित करने की चुनौती कांग्रेस नेतृत्व के सामने है। मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे विधायकों के नामों को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग स्तर पर चर्चा होने की बात कही जा रही है, लेकिन किसी नाम पर औपचारिक मुहर लगने की पुष्टि नहीं हुई है।

मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने के अलावा वर्तमान मंत्रियों के विभागों में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सरकार के कामकाज और मंत्रियों के प्रदर्शन से संबंधित रिपोर्ट पार्टी हाईकमान के सामने रख सकते हैं। इसके आधार पर यह तय किया जा सकता है कि किन मंत्रियों के विभाग बदले जाएं और किन विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करने का अवसर दिया जाए।

सूत्रों का दावा है कि नए मंत्रियों की नियुक्ति और विभागों में फेरबदल से जुड़ा अंतिम निर्णय कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से होगा। राहुल गांधी की भूमिका को भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए संभावित बदलावों से जुड़े नामों और विभागों को फिलहाल अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है।

कांग्रेस नेतृत्व के लिए मंत्रिमंडल विस्तार केवल रिक्त पद भरने की प्रक्रिया नहीं होगा। इसमें राज्य के अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों और जिलों का प्रतिनिधित्व, जातीय तथा सामाजिक समीकरण, वरिष्ठता, संगठन के प्रति योगदान और विधायक के प्रदर्शन जैसे पहलुओं का संतुलन बनाना होगा। किसी एक क्षेत्र को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने या किसी दावेदार की अनदेखी होने से पार्टी के भीतर असंतोष पैदा हो सकता है।

प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। निचले और ऊपरी क्षेत्रों के साथ पुराने तथा नए जिलों के बीच संतुलन बनाए रखना प्रत्येक सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ने पर विपक्ष को सरकार पर हमला करने का अवसर मिल सकता है। इसलिए हाईकमान जल्दबाजी के बजाय व्यापक विचार-विमर्श के बाद फैसला लेना चाहता है।

विभागों में फेरबदल की संभावना को मंत्रियों के प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार के विभिन्न विभागों में योजनाओं की प्रगति, बजट के उपयोग, जनता की शिकायतों के समाधान और प्रशासनिक फैसलों की गति का मूल्यांकन किया जा सकता है। जिन विभागों में काम की गति अपेक्षा से कम पाई जाएगी, उनमें बदलाव या जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण संभव है।

हालांकि मंत्रियों के प्रदर्शन को लेकर कोई आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। सरकार की ओर से भी किसी मंत्री के कामकाज पर प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई है। ऐसे में विभाग बदले जाने की चर्चाएं मुख्य रूप से राजनीतिक सूत्रों और आंतरिक बैठकों से जुड़ी सूचनाओं पर आधारित हैं। अंतिम स्थिति आधिकारिक अधिसूचना जारी होने पर ही साफ होगी।

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की सचिवालय में मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। वे समय-समय पर सरकार और संगठन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखते रहे हैं। उनके विभाग या भूमिका में किसी बदलाव को लेकर भी राजनीतिक अटकलें सामने आती रही हैं, लेकिन इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है। इसी प्रकार अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की संभावनाओं पर भी निगाहें बनी हुई हैं।

मंत्रिमंडल विस्तार में देरी से मंत्री पद के दावेदार विधायकों का इंतजार बढ़ता जा रहा है। सरकार के गठन के बाद से जिन नेताओं को जगह मिलने की उम्मीद रही है, वे पार्टी नेतृत्व के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। पार्टी के सामने दावेदारों को संतुष्ट करने के साथ मंत्रिमंडल का आकार कानूनी सीमा में रखने की बाध्यता भी है।

विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। यदि मंत्रिमंडल विस्तार या विभागों में बड़े बदलाव होते हैं तो वह इसे सरकार के मौजूदा कामकाज से जोड़कर सवाल उठा सकता है। दूसरी ओर, कांग्रेस इसे प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को व्यापक बनाने की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत कर सकती है।

फिलहाल शुक्रवार की कैबिनेट बैठक स्थगित होने के बाद तत्काल बदलाव की संभावना कम दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री के स्वस्थ होने, नई बैठक की तारीख तय होने और हाईकमान से परामर्श पूरा होने के बाद ही आगे की तस्वीर साफ होगी। राजनीतिक गलियारों में संभावित नामों और विभागों को लेकर चर्चाएं भले जारी हों, लेकिन सरकार और पार्टी नेतृत्व ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा और इसमें किन नए चेहरों को जगह मिलेगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि वर्तमान मंत्रियों के विभागों में बदलाव होता है या सरकार मौजूदा व्यवस्था के साथ आगे बढ़ती है। फिलहाल हिमाचल की राजनीति में बना सस्पेंस हाईकमान के निर्णय तक जारी रहने की संभावना है।

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