Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में इस साल मौसम की अनियमितताओं और प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद आम की फसल सबसे ज़्यादा होने की उम्मीद जताई जा रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं और किसानों की मेहनत के कारण आम की उपज अच्छी रहने की संभावना है।
पिछले साल की तुलना में इस साल मानसून में देरी और कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी थी। इसके बावजूद, कांगड़ा के बागवानों ने समय पर देखभाल, कीट और रोग नियंत्रण, और उन्नत कृषि तकनीक का उपयोग किया। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यही वजह है कि जिले में आम की फसल अन्य जिलों की तुलना में बेहतर रहेगी।
कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमने किसानों को मौसम की अनिश्चितताओं के बावजूद उचित उपाय अपनाने की सलाह दी थी। समय पर सिंचाई, उर्वरक का संतुलित उपयोग और रोग नियंत्रण के तरीकों ने इस साल आम की उपज को सुरक्षित रखने में मदद की है। कांगड़ा में लगभग 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती की जाती है, और यहां से अच्छी मात्रा में उत्पादन की उम्मीद है।”
कांगड़ा जिले के बागवान भी इस वर्ष की फसल को लेकर उत्साहित हैं। रामलाल नामक किसान ने कहा, “मौसम ने परेशान किया, लेकिन हमने आधुनिक तकनीकों और समय पर फसल की देखभाल से आम को बचाया। अब उम्मीद है कि अच्छी उपज होगी और बाजार में हमारी आम की मांग भी बढ़ेगी।”
विशेषज्ञों का कहना है कि कांगड़ा जिले में आम की उपज के बढ़ने का कारण स्थानीय मिट्टी की उपयुक्तता, जलवायु और किसानों का समर्पण है। साथ ही, जिले में मौसम की अनियमितताओं के बावजूद सिंचाई के लिए ट्यूबवेल और नहरों का सही इस्तेमाल भी उपज को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल है।
इस वर्ष के उत्पादन के बढ़ने से न केवल किसानों की आय में सुधार होगा, बल्कि राज्य में आम के व्यापार और निर्यात को भी लाभ मिलेगा। कांगड़ा का आम न केवल स्थानीय बाजार में बल्कि अन्य राज्यों में भी अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि वे फसल की कटाई और भंडारण में सावधानी बरतें ताकि उपज की गुणवत्ता बनी रहे और बाजार में मूल्य स्थिर रहे। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना चाहिए।