Shimla. शिमला। हिमाचल प्रदेश का बदलता चेहरा अब सरकारी दस्तावेजों में भी साफ नजर आने लगा है। जनगणना-2027 के पहले चरण में चल रही हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस के दौरान सामने आ रही तस्वीर बता रही है कि पिछले 16 वर्षों में प्रदेश के गांवों की पहचान पूरी तरह बदल चुकी है। कभी मिट्टी, पत्थर और स्लेट की छत वाले पारंपरिक मकानों के लिए पहचाने जाने वाले हिमाचल में अब आरसीसी के बहुमंजिला पक्के मकानों का दौर है। कच्चे मकान अब अपवाद बनते जा रहे हैं, जबकि गांवों में भी शहर जैसी सुविधाएं तेजी से पहुंच चुकी हैं। हाउस लिस्टिंग के दौरान गणनाकर्मी केवल मकानों की गिनती नहीं कर रहे, बल्कि हर घर का पूरा सामाजिक और आर्थिक प्रोफाइल तैयार कर रहे हैं।
इसमें मकान कच्चा है या पक्का, कितने कमरे हैं, शौचालय, अलग रसोई, पीने के पानी की व्यवस्था, एलपीजी गैस, इंटरनेट, बिजली और निजी वाहन जैसी सुविधाओं का भी रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि प्रदेश के अधिकांश परिवार अब पक्के मकानों में रह रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में भी दो और तीन मंजिला आरसीसी भवन तेजी से बढ़े हैं। पहाड़ों के गांवों में अब टाइल्स वाली रसोई, अटैच बाथरूम, पानी की टंकियां, एलपीजी गैस, वॉशिंग मशीन, इंटरनेट और निजी वाहन आम होते जा रहे हैं।
इस बार जनगणना केवल मकानों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन स्तर का भी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार यह तय करेगी कि किन क्षेत्रों में अभी भी पेयजल, स्वच्छता, स्वच्छ ईंधन व इंटरनेट सुविधाओं की जरूरत है। आधुनिकता से भरे इस बदलाव बीच एक चिंता भी सामने आई है। प्रदेश में आधुनिक निर्माण के बढ़ते चलन के कारण पत्थर, लकड़ी और स्लेट से बने पारंपरिक हिमाचली घर तेजी से कम हो रहे हैं।