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हिमाचल प्रदेश
चुनाव से पहले विपक्ष को डराने की कोशिश, ED और CBI का इस्तेमाल: राठौर
Ratna Netam
6 May 2026 6:37 PM IST

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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: वरिष्ठ राजनीतिक नेता और विपक्षी नेता कुलदीप राठौर ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावों से पहले विपक्षी दलों और नेताओं को डराने और दबाव में रखने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों, जैसे ED और CBI का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनावी निष्पक्षता के लिए खतरनाक है।
कुलदीप राठौर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि चुनावों के समय विपक्षी नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं पर कई तरह के मामलों और जांचों का दवाब बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम देख रहे हैं कि चुनाव से पहले ED और CBI जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को डराने, परेशान करने और उनकी आवाज़ दबाने के लिए किया जा रहा है। यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।”
राठौर ने आगे कहा कि विपक्षी दलों की नीतियों और उनके कार्यकर्ताओं की सख्ती से जांच करना ठीक है, लेकिन इसका दुरुपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल चुनावी रणनीति नहीं बल्कि लोकतंत्र की प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप भी है।
इस अवसर पर राठौर ने विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की और कहा कि उन्हें डरने या पीछे हटने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता के सामने सच्चाई लाना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना सभी विपक्षी दलों की जिम्मेदारी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे आरोप अक्सर चुनावी मौसम में चर्चा का हिस्सा बनते हैं और जनता के बीच सवाल उठाते हैं कि क्या जांच एजेंसियों का इस्तेमाल निष्पक्ष और लोकतांत्रिक ढंग से किया जा रहा है या राजनीतिक लाभ के लिए। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह देश की न्यायिक और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा कम करने का कारण बन सकता है।
कुलदीप राठौर ने केंद्रीय जांच एजेंसियों से अपील की कि वे निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच करें और किसी भी राजनीतिक दबाव में न आएं। उन्होंने कहा कि जनता को यह देखने का अधिकार है कि एजेंसियां अपनी जिम्मेदारी निष्पक्ष तरीके से निभा रही हैं।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दलों ने राठौर के आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि चुनाव से पहले कई नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार जांचों का दवाब बढ़ाया जा रहा है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी समय में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल एक संवेदनशील विषय है। उन्होंने कहा कि यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे चुनाव प्रक्रिया और लोकतंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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