चिड़ियाघर के कर्मचारियों के लिए SOP तैयार करने के लिए एक्सपर्ट पैनल बनाया गया।

Update: 2026-06-25 03:45 GMT

बेंगलुरु: कर्नाटक हाई कोर्ट ने बुधवार को एक वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशनिस्ट (वन्यजीव संरक्षणवादी) द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) का निपटारा कर दिया। याचिका में मांग की गई थी कि चिड़ियाघर के कर्मचारियों, पशु चिकित्सकों, ज़ू-कीपर्स और अन्य लोगों के जानवरों के बाड़े में जाने के लिए व्यापक सुरक्षा प्रोटोकॉल, जोखिम का आकलन करने के तरीके और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाने और लागू करने के निर्देश दिए जाएं।

इस याचिका का मकसद ऐसी घटनाओं को रोकना और कम करना था जिनसे चोटें लगती हैं या मौतें होती हैं। सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी (CZA) के वकील ने कोर्ट को बताया कि SOP बनाने के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाई गई है, जिसके बाद कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। वकील ने यह भी बताया कि यह मामला अभी अथॉरिटी के विचाराधीन है।

चीफ जस्टिस विभु बखरू और जस्टिस केएस हेमालेखा की डिवीज़न बेंच ने याचिका का निपटारा किया। यह याचिका 24 साल के वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशनिस्ट भुवन एम. ने दायर की थी। भुवन अभी यूके की एक यूनिवर्सिटी से 'अप्लाइड वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन' में MSc कर रहे हैं। इस मामले में उनकी ओर से उनकी मां, मंगलुरु की रहने वाली पुष्पालता बी. पेश हुईं।


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