Karnataka : शिवकुमार ने मुंबई मॉडल अपनाने के दिए निर्देश

Update: 2026-06-25 06:27 GMT

Karnataka कर्नाटक: मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य में झुग्गी-बस्तियों के पुनर्निर्माण के लिए मुंबई मॉडल का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस मॉडल पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को मंजूरी दे दी जाए, ताकि राज्य में शहरी आवास मंत्रालय को और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सके।

बुधवार को बंगले में आवास विभाग की प्रगति समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने आवास मंजूरी की असामयिक गति पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण आवास निर्माण और भूमि आवंटन में हो रही देरी पर चिंता जताई।

शिवकुमार ने कहा कि अधिकारियों को मुंबई के झुग्गी-पुनर्विकास मॉडल का गहन अध्ययन करना चाहिए और यह भी जांचना चाहिए कि वहां लागू व्यवस्था से राज्य में बेहतर परिणाम कैसे प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि मुंबई में दिए जा रहे घरों की तुलना में बड़े और अधिक आलीशान घरों के निर्माण की स्थिरता पर एक अलग रिपोर्ट तैयार की जाए, जिसे आगामी विज्ञप्ति बैठक में प्रस्तुत किया जाए।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार की प्राथमिकता हर गरीब पात्र परिवार को आवास की सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन प्राणियों को घर की आवश्यकता है, उन्हें समय पर घर और जमीन उपलब्ध करायी जाये।

उन्होंने स्थायी आवास आवास प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान पुरातत्व व्यवस्था से यह सुनिश्चित नहीं हो पाता है कि घर में वास्तव में लोगों तक पहुंच है या नहीं।

इस सन्दर्भ में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि टेलीकॉम सिस्टम अपने स्थान पर समाप्त कर एक सार्वजनिक लॉटरी सिस्टम लागू करे। उनके अनुसार, इसी तरह आवास आवासीय प्रक्रिया अधिक स्थिर और स्थिर रहेगी।

मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि आवास के तहत जो स्थिर व्यवस्था है, उसमें वास्तव में लोगों को मिल रहा है, जिसमें इसकी सबसे अधिक जरूरत है, या फिर आर्थिक रूप से अक्षम लोगों को अधिक लाभ उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के छात्रों पर रोक के लिए सुधार जरूरी है।

विशेषज्ञ का मानना ​​है कि मुंबई का जग्गी पुनर्विकास मॉडल देश में शहरी विकास के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है, जहां सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से बड़े पैमाने पर पुनर्विकास उद्योग विकसित किए जाते हैं।

कर्नाटक सरकार अब इस मॉडल का अध्ययन कर यह तय कर सकती है कि राज्य में इसे कैसे लागू किया जाए। साथ ही, आवास आवास प्रणाली में प्रस्तावित बदलावों से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को अधिक लाभ मिलने की उम्मीद जा रही है।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री के इन आंकड़ों में राज्य में आवास नीति में सुधार और विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिस पर आने वाले समय में विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाएगी।

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