Karnataka कर्नाटक: विज्ञापन निदेशालय (ईडी) ने रविवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बेलगावी में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और कांग्रेस मंत्री सतीश जारकीहोली के जीजा से जुड़ी एक तस्वीर शेयर की। यह एक्शन साजोसामान विभाग के ऑटोमोबाइल कमिश्नर (एनफोर्समेंट एंड क्राइम) वै. मंजुलनाथ और उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ की गई है।
दस्तावेज़ के अनुसार, यह रॉबर्ट्स कॉलेज और गोइंग से ईडी अधिकारियों की टीम गई थी। जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई विदेशी लेन-देन के आधार पर की है, कथित मनी लॉन्ड्रिंग के एवेस्टमेंट और अमेरीकी संपत्ति के माध्यम से धन जमा करने के आधार पर।
जांच के कार्यालय में अधिकारी वै. मंज़िलनाथ, बेल्लारी से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व अल्पसंख्यक वाई. गैंगअप्पा के पुत्र अज्ञात निकलते हैं। प्रोजेक्ट के दौरान उनके कई खुलासे और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की गई। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किसी अवैध वित्तीय नेटवर्क के जरिए क्या संपत्ति बनाई गई या धन का लेन-देन किया गया।
आधिकारिक ने बताया कि यह कार्रवाई केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कथित सहयोगियों और उससे जुड़े अन्य लोगों की भी जांच की जा रही है। ईडी की टीम ने कई डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी जानकारी जब्त की है।
मामले में राजनीतिक रूप से भी कई नाम सामने आये हैं. श्रीश जारकीहोली कर्नाटक सरकार में लोक निर्माण मंत्री हैं। वहीं उनके परिवार के अन्य सदस्यों को अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक विरासत में शामिल किया गया है। रमेश और बालचंद्र भारतीय जनता पार्टी के विधायक पद पर हैं, जबकि लखनऊ एक विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य हैं। परिवार के एक अन्य सदस्य भीमशी एक डायनासोर के रूप में मेहमान हैं।
हालाँकि, जांच एजेंसी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी राजनीतिक गतिविधि पर ध्यान केंद्रित करने वाले वित्तीय निवेशकों और संदिग्ध लेन-देन की जांच की जा रही है। ईडी यह संकेत देने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर नामी निवेशकों और निवेशकों के लिए संपत्ति खरीदी गई।
इस उत्पाद के बाद बेलगा और वी के आसपास के गांवों में उद्यमियों और राजनीतिक हलकों में हलचल का आकलन किया गया है। इस मामले से जुड़े साक्षियों की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञ का मानना है कि इस तरह की जांच में वित्तीय दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच की जाती है, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होती है। यदि देनदारी की पुष्टि होती है तो केस मनी लॉन्ड्रिंग सपोर्ट एक्ट (पीएमएलए) के तहत आगे बढ़ोतरी हो सकती है।
ईडी की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब यूनेस्को में वित्तीय फर्मों और अवैध संपत्तियों पर आरोप लगाते हुए जांच-पड़ताल सक्रिय कर दी गई है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी घोषणा होने की संभावना बनी हुई है।
कुल मिलाकर, बेलगावी में हुई इस मोटरसाइकिल ने राजनीतिक और संस्थागत दोनों भागों पर ध्यान आकर्षित किया है। अब जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई और बरामद दस्तावेजों के विश्लेषण पर इस पूरे मामले की दिशा तय नहीं है।