शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को रामपुर विधानसभा क्षेत्र के नोगली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राज्यभर के 1,471 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और उनके आश्रितों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत 5.78 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता वितरित की। यह सहायता हिमाचल प्रदेश बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड (HPBOCWWB) की अलग-अलग योजनाओं के तहत प्रदान की गई।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पारदर्शी तरीके से और बिना अनावश्यक परेशानी के पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन में सरलता और समयबद्धता सुनिश्चित करने को भी कहा।मुख्यमंत्री के मुताबिक वित्तीय सहायता का लाभ पंजीकृत श्रमिकों की विधवाओं, दिव्यांग लोगों, जरूरतमंद परिवारों और श्रमिकों के बच्चों को दिया गया है। इसमें उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, विवाह और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता शामिल है।
1,471 लाभार्थियों को मिली सहायता
राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड की विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 1,471 पंजीकृत श्रमिकों और उनके आश्रितों के बीच 5.78 करोड़ रुपये वितरित किए गए।इस आर्थिक मदद का उद्देश्य निर्माण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों और उनके परिवारों पर आने वाले वित्तीय बोझ को कम करना है। निर्माण श्रमिकों के परिवारों में शिक्षा, विवाह, बीमारी, दिव्यांगता या परिवार के कमाऊ सदस्य की मृत्यु जैसी परिस्थितियों में आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं। बोर्ड की योजनाओं के माध्यम से ऐसे परिवारों को निर्धारित पात्रता के आधार पर सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
बच्चों की शिक्षा के लिए भी आर्थिक मदद
कल्याणकारी योजनाओं में श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जारी रखने के लिए वित्तीय सहायता दी गई।मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक स्थिति किसी बच्चे की पढ़ाई में बाधा नहीं बननी चाहिए। निर्माण श्रमिकों के बच्चे भी उच्च और तकनीकी शिक्षा हासिल कर अपने भविष्य को बेहतर बना सकें, इसके लिए सरकार सहायता उपलब्ध करा रही है।तकनीकी और उच्च शिक्षा का खर्च कई श्रमिक परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में कल्याण बोर्ड से मिलने वाली वित्तीय सहायता परिवारों को पढ़ाई का खर्च उठाने में मदद कर सकती है।
विधवाओं और दिव्यांगों को भी सहायता
कार्यक्रम में पंजीकृत श्रमिकों की विधवाओं और दिव्यांग लाभार्थियों को भी आर्थिक मदद प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के ऐसे वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, जिन्हें आर्थिक और सामाजिक स्तर पर अधिक सहायता की जरूरत है।उन्होंने कहा कि निर्माण क्षेत्र से जुड़े श्रमिक प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सड़क, भवन, पुल और दूसरी बुनियादी परियोजनाओं के निर्माण में उनका योगदान रहता है। इसलिए श्रमिकों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
विवाह और अन्य जरूरतों के लिए मदद
कल्याण बोर्ड की योजनाओं के तहत विवाह और दूसरी आवश्यक जरूरतों के लिए भी आर्थिक सहायता दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों को अलग-अलग परिस्थितियों में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए बोर्ड के माध्यम से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।इन योजनाओं का मकसद केवल तत्काल वित्तीय सहायता देना नहीं, बल्कि श्रमिक परिवारों को सामाजिक सुरक्षा का दायरा उपलब्ध कराना भी है। सरकार का प्रयास है कि पात्र श्रमिकों को योजनाओं की जानकारी समय पर मिले और आवेदन की प्रक्रिया को लेकर उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े।
घर तक पहुंचाया जाए योजनाओं का लाभ
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अधिकारियों से कहा कि पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दे रही है, जिसमें योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक आसानी से पहुंचे।उन्होंने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। लाभार्थियों की पहचान से लेकर वित्तीय सहायता जारी करने तक की प्रक्रिया को सरल और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि सरकारी सहायता वास्तव में उन लोगों तक पहुंचे, जिनके लिए योजनाएं बनाई गई हैं।
निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर जोर
हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग निर्माण गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। इनमें दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिकों के अलावा विभिन्न निर्माण कार्यों में लगे कामगार शामिल हैं। असंगठित प्रकृति के कारण इस क्षेत्र के श्रमिकों को नियमित रोजगार और आय से जुड़ी अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ सकता है।ऐसे श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने में हिमाचल प्रदेश बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण है। पंजीकृत श्रमिक बोर्ड की निर्धारित योजनाओं के तहत पात्रता के आधार पर विभिन्न प्रकार की सहायता प्राप्त कर सकते हैं।मुख्यमंत्री ने श्रमिकों से भी अपील की कि वे अपना पंजीकरण और जरूरी दस्तावेज पूरे रखें, ताकि पात्रता होने पर उन्हें योजनाओं का लाभ मिलने में किसी तरह की परेशानी न आए।
जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाने का लक्ष्य
नोगली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार श्रमिकों के कल्याण को व्यापक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़कर देख रही है। शिक्षा से लेकर पारिवारिक जरूरतों तक सहायता उपलब्ध कराने का उद्देश्य श्रमिक परिवारों को आर्थिक रूप से सहारा देना है।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विभिन्न विभागों और कल्याण बोर्डों के माध्यम से ऐसी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने का प्रयास कर रही है। पात्र लोगों को समय पर सहायता मिले, इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा रही है।रामपुर के नोगली में 1,471 पंजीकृत श्रमिकों और उनके आश्रितों को 5.78 करोड़ रुपये की सहायता का वितरण इसी दिशा में उठाया गया कदम है। सरकार के अनुसार आने वाले समय में भी निर्माण श्रमिकों, उनके परिवारों और समाज के जरूरतमंद वर्गों को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर जारी रहेगा।