Chandigarh चंडीगढ़। पंजाब में किसानों की समस्याओं को लेकर किसान मजदूर संघर्ष समिति ने सख्त रुख अपनाया है। समिति के राज्य महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों का समाधान नहीं करती है, तो 20 दिसंबर को पंजाब के चार प्रमुख स्थानों—संगरूर, बठिंडा, अमृतसर और फिरोजपुर—पर रेल रोको आंदोलन किया जाएगा। सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि इस आंदोलन के बाद एक बैठक होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि यह विरोध कब तक चलेगा। उनका कहना है कि अगले दिन यानी 21 दिसंबर को मुख्य मांगों पर चर्चा करने के लिए बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में किसानों की समस्याओं और उनके समाधान पर निर्णय लिया जाएगा।
उनकी सबसे पहली मांग बिजली संशोधन बिल 2025 को लेकर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार को किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए और इस बिल में किसानों के हितों का पूरी तरह से ध्यान रखा जाना चाहिए। सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि बिल में यदि किसानों के अधिकार और लाभ सुरक्षित नहीं किए गए, तो किसान सड़कों और रेल मार्गों पर अपनी आवाज उठाने के लिए मजबूर होंगे। समिति के अनुसार, किसानों की अन्य मांगों में कृषि उपज के उचित मूल्य, सिंचाई सुविधाओं में सुधार, कर्ज माफी, और कृषि इनपुट्स पर सब्सिडी शामिल हैं। किसान नेताओं का कहना है कि अगर इन मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन का दायरा और बढ़ सकता है।
सरवन सिंह पंधेर ने यह भी कहा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक के लिए संघर्ष करेंगे, लेकिन अगर सरकार अनदेखी करती है, तो आंदोलन सक्रिय और व्यापक स्तर पर फैल सकता है। उन्होंने प्रशासन और जनता से अपील की कि आंदोलन के दौरान शांति बनाए रखें और किसी भी तरह की हिंसा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से बचें। वहीं, पंजाब सरकार ने इस मामले में फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन प्रशासन ने चेतावनी दी है कि रेल रोको जैसे आंदोलनों पर कड़ी नजर रखी जाएगी और सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली संशोधन बिल 2025 और किसानों की अन्य मांगों को लेकर यह आंदोलन राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि सरकार समय रहते समाधान नहीं करती, तो आंदोलन लंबी अवधि तक जारी रह सकता है और राज्य की परिवहन प्रणाली पर असर डाल सकता है। किसान नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सिर्फ न्यायसंगत और उचित नीति लागू करवाना है और आंदोलन का स्वरूप पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन सरकार को चेतावनी है कि किसानों की अनदेखी गंभीर परिणाम ला सकती है। इस प्रकार, पंजाब में किसानों का यह आंदोलन आगामी दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का प्रमुख विषय बन सकता है, जिसमें सरकार और किसान दोनों को अपने कदम सोच-समझकर रखने होंगे।