सिरसा: हरियाणा के सिरसा में आठवीं कक्षा की नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी हरप्रीत सिंह को दोषी करार देते हुए 20 साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 52 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। पीड़िता वारदात के बाद आरोपी की धमकी के कारण लंबे समय तक चुप रही थी। गर्भवती होने के बाद उसने अपनी मां को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
मामला सिरसा के डबवाली क्षेत्र का है। पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक घटना के समय पीड़िता की उम्र 13 वर्ष थी और वह आठवीं कक्षा में पढ़ती थी। उसकी करीब छह महीने पहले हरप्रीत सिंह से जान पहचान हुई थी। जनवरी 2024 की एक शाम आरोपी उसे धर्मशाला के पास मिला और बातचीत करने के बहाने अपने साथ धर्मशाला में ले गया। आरोप था कि वहां एक कमरे में उसने नाबालिग के साथ जबरदस्ती की।
पीड़िता के बयान के अनुसार आरोपी ने वारदात के बाद उसे धमकी दी कि यदि उसने किसी को इसके बारे में बताया तो उसे जान से मार देगा। इसी डर के कारण किशोरी ने शुरुआत में अपने परिवार को भी घटना के बारे में नहीं बताया। आरोप है कि इसके बाद भी आरोपी ने उसके साथ कई बार जबरदस्ती की।
कुछ महीने बाद जुलाई 2024 में किशोरी के गर्भवती होने का पता चला। इसके बाद उसने हिम्मत जुटाकर अपनी मां को पूरी घटना बताई। बेटी की आपबीती सुनने के बाद मां उसे महिला पुलिस थाने लेकर पहुंची और पुलिस को शिकायत दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने 24 जुलाई 2024 को आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए सिरसा के नागरिक अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस ने जांच आगे बढ़ाते हुए हरप्रीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा। आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। आरोपी पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि गांव में दोनों पक्षों के बीच पंचायत हुई थी और उसमें समझौते की बात कही गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक पंचायत में यह सहमति होने का दावा किया गया था कि पीड़िता जब बालिग हो जाएगी तो आरोपी उससे शादी करेगा। आरोपी पक्ष की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्राथमिकी रद्द कराने के लिए याचिका दाखिल करने की बात भी अदालत के सामने रखी गई थी। हालांकि अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने तथा उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायाधीश डॉ. नरेश कुमार सिंघल की अदालत ने हरप्रीत सिंह को दोषी पाया। अदालत ने उसे 20 साल की कैद और 52 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इस मामले में पीड़िता की कम उम्र और उसे कथित तौर पर दी गई धमकी भी महत्वपूर्ण पहलू रहे। घटना के बाद डर के कारण वह महीनों तक चुप रही और गर्भावस्था सामने आने के बाद ही परिवार को पूरी बात बता सकी। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई शुरू हुई और मामला न्यायालय तक पहुंचा।
यह मामला एक बार फिर बताता है कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में परिवार और समाज की सतर्कता कितनी महत्वपूर्ण है। बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, भय या असामान्य परेशानी दिखाई देने पर उनकी बात संवेदनशीलता से सुनना जरूरी है। साथ ही ऐसी किसी घटना की जानकारी मिलने पर समझौते के बजाय कानूनी प्रक्रिया के जरिए कार्रवाई की जानी चाहिए।
फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के साथ करीब दो साल पुराने मामले में दोषी को सजा सुनाई गई है। अदालत के फैसले ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नाबालिग के खिलाफ गंभीर यौन अपराध के मामले में कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है और सामाजिक स्तर पर हुए कथित समझौते से आपराधिक प्रक्रिया स्वतः समाप्त नहीं होती।
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