चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार मीट की दुकानों और स्लॉटर हाउस संचालकों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। राज्य में अब इन कारोबारों के लिए दोहरे लाइसेंस की व्यवस्था खत्म की जाएगी। इसके लिए हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 में संशोधन किया जाएगा। सरकार विधानसभा में इस संबंध में विधेयक पेश करने जा रही है।

मौजूदा व्यवस्था के तहत मीट की दुकानों और स्लॉटर हाउस संचालित करने वालों को खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के लाइसेंस के साथ-साथ नगर निगम से भी ट्रेड लाइसेंस लेना पड़ता था। सरकार का कहना है कि एक ही गतिविधि के लिए दो अलग-अलग विभागों से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। सरकार के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े नियमों की निगरानी पहले से ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन हरियाणा द्वारा की जा रही है। ऐसे में नगर निगम स्तर पर अलग लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म करने से कारोबारियों को राहत मिलेगी और प्रक्रिया आसान होगी।
विधेयक में क्या होगा बदलाव
हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 की संबंधित धारा में संशोधन कर नगर निगम से अलग ट्रेड लाइसेंस की बाध्यता हटाने का प्रावधान किया जाएगा। संशोधन के बाद मीट दुकान, पोल्ट्री कारोबार और स्लॉटर हाउस संचालन के लिए नगर निगम लाइसेंस की जरूरत नहीं रहेगी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं होगा कि मांस कारोबार पर सभी नियम समाप्त हो जाएंगे। कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा मानकों, स्वच्छता नियमों और खाद्य एवं औषधि प्रशासन से जुड़े जरूरी लाइसेंस व जांच प्रक्रिया का पालन करना होगा।
कारोबारियों को मिलेगी राहत
सरकार का मानना है कि दोहरे लाइसेंस की व्यवस्था खत्म होने से छोटे कारोबारियों पर नियमों का बोझ कम होगा। उन्हें बार-बार अलग-अलग विभागों में आवेदन और दस्तावेजी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। व्यापारियों का कहना है कि एक ही काम के लिए दो लाइसेंस लेने की प्रक्रिया समय और धन दोनों की खपत करती थी। नए संशोधन से कारोबार को सुगमता मिलेगी।
सरकार का तर्क
राज्य सरकार ने कहा है कि केंद्र के विनियमन प्रकोष्ठ की ओर से भी अनावश्यक दोहरी लाइसेंस व्यवस्था खत्म करने की दिशा में सुझाव दिए गए थे। इसी आधार पर हरियाणा में नियमों की समीक्षा की गई और संशोधन का फैसला लिया गया। फिलहाल विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद मीट दुकानों और स्लॉटर हाउस के लिए नगर निगम लाइसेंस की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी।

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