हरियाणा Haryana : मिशन टू द डेस्परेट एंड डेस्टिट्यूट (एमडीडी) ऑफ इंडिया, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) और महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी के तत्वावधान में बाल विवाह के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान शुरू किया गया है। अभियानकर्ताओं ने बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाकर और उनके हस्ताक्षर प्राप्त करके निवासियों को शामिल किया। रोहतक रेलवे स्टेशन पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम)-सह-डीएलएसए, रोहतक की सचिव डॉ. तरन्नुम खान के मार्गदर्शन में 'शक्ति - बाल विवाह के खिलाफ आवाज को सशक्त बनाना' शीर्षक से जन जागरूकता अभियान चलाया गया। महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी, रोहतक करमिंदर कौर ने कहा, "इस पहल का उद्देश्य लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में शिक्षित करना और विभिन्न माध्यमों से इसके कानूनी पहलुओं के
बारे में जानकारी प्रदान करना है और यह एक महीने तक जारी रहेगा।" उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक जागरूकता के माध्यम से बाल विवाह को खत्म किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। अधिकारी ने लोगों को बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के बारे में भी जानकारी दी और बताया कि बाल विवाह में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए दो साल तक की सजा हो सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की का विवाह कानूनी नहीं है। एमडीडी के जिला समन्वयक ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य कानूनी जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से लोगों को इसके प्रतिकूल प्रभावों के बारे में शिक्षित करके बाल विवाह को खत्म करना है। एमडीडी प्रतिनिधि मिथलेश ने कहा, "अभियान बच्चों के अधिकारों की रक्षा और इस कुप्रथा को खत्म करके कमजोर समूहों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।" यात्रियों को देश को बाल विवाह से मुक्त बनाने की शपथ दिलाई गई और उन्हें अभियान में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया।