मांजलपुर उपचुनाव में वोटिंग प्रतिशत बना चर्चा का विषय

Update: 2026-08-01 13:58 GMT

गुजरात: वडोदरा जिले की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बेहद कम मतदान ने राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की चिंता बढ़ा दी है। इस सीट पर करीब 37 प्रतिशत मतदान हुआ, जो चुनावी गणित को पूरी तरह बदलने वाला माना जा रहा है। खास बात यह है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की जीत का अंतर इस बार पड़े कुल वोटों से भी ज्यादा था। ऐसे में सभी दल अपनी-अपनी रणनीति और संभावनाओं का आकलन करने में जुट गए हैं।

राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, मांजलपुर सीट पर हुए उपचुनाव में कुल 82,310 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वहीं, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार योगेश पटेल ने 1,00,754 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। इस बार मतदान का आंकड़ा ही उस जीत के अंतर से कम रह गया है, जिससे चुनावी परिणाम को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

मांजलपुर सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। इस बार भाजपा ने सतीश पटेल को मैदान में उतारा है। पार्टी को भरोसा है कि परंपरागत समर्थक उसके साथ बने रहेंगे, लेकिन कम मतदान प्रतिशत ने भाजपा नेताओं की चिंता भी बढ़ा दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कम मतदान अक्सर किसी एक पक्ष के पक्ष या विपक्ष में संकेत दे सकता है, लेकिन इस बार परिस्थितियां काफी अलग हैं।

कांग्रेस प्रत्याशी भिखा भाई रबारी को उम्मीद है कि आम आदमी पार्टी के वोट बैंक का फायदा उन्हें मिल सकता है। पिछले चुनाव में कांग्रेस को करीब 19 हजार 379 वोट मिले थे, जबकि आम आदमी पार्टी को लगभग 11 हजार वोट प्राप्त हुए थे। इस बार आम आदमी पार्टी ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है, इसलिए कांग्रेस को उम्मीद है कि आप समर्थकों के वोट उसके खाते में आ सकते हैं।

हालांकि, कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती वर्ष 2022 में भाजपा की बड़ी जीत का अंतर है। राजनीतिक समीकरणों के मुताबिक, पिछले चुनाव में भाजपा की बढ़त इतनी मजबूत थी कि केवल विपक्षी वोटों के जुड़ने से मुकाबला आसान नहीं होगा। यही वजह है कि कांग्रेस भी जीत का दावा करते हुए सावधानी से अपनी रणनीति बना रही है।

मांजलपुर उपचुनाव में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया भी चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान करीब 44 हजार मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इसी कारण चुनावी विश्लेषकों को पुराने आंकड़ों के आधार पर इस बार के परिणाम का अनुमान लगाने में मुश्किल हो रही है।

इस चुनाव को छात्र आंदोलन और मतदाता सूची पुनरीक्षण के बाद राज्य का एक महत्वपूर्ण चुनाव भी माना जा रहा है। कम मतदान के कारण भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर नहीं आ रहे हैं। जहां भाजपा अपने मजबूत संगठन और पुराने जनाधार पर भरोसा कर रही है, वहीं कांग्रेस नए समीकरणों और विपक्षी वोटों के ध्रुवीकरण की उम्मीद लगाए बैठी है।

अब सभी की नजरें चुनाव परिणाम पर टिकी हैं। मांजलपुर सीट का नतीजा यह तय करेगा कि कम मतदान का असर किस दल के पक्ष में जाता है। फिलहाल, 37 प्रतिशत वोटिंग ने गुजरात की इस सीट पर सियासी उत्सुकता और बढ़ा दी है।

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