कांग्रेस को बड़ा झटका, बीजेपी के सतीश पटेल ने मारी बाजी

Update: 2026-08-03 12:34 GMT

वडोदरा :   गुजरात के मांजलपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपना दबदबा बरकरार रखा है। भाजपा उम्मीदवार सतीश पटेल ने सोमवार को हुए मतगणना के बाद बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी भीखा रबारी को 30,630 वोटों के भारी अंतर से हराकर मांजलपुर सीट पर भाजपा का कब्जा कायम रखा।

20 राउंड की मतगणना के बाद घोषित अंतिम परिणामों के अनुसार भाजपा उम्मीदवार सतीश पटेल को कुल 55,481 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार भीखा रबारी को 24,851 वोट हासिल हुए। इस तरह पटेल ने कांग्रेस प्रत्याशी को बड़े अंतर से मात दी। उनकी जीत के साथ ही वडोदरा में भाजपा की मजबूत पकड़ और अधिक मजबूत हो गई है।

मांजलपुर सीट पर मतगणना सोमवार सुबह मकरपुरा स्थित भारतीय विद्या भवन में शुरू हुई। शुरुआती दौर से ही भाजपा उम्मीदवार सतीश पटेल ने बढ़त बना ली थी। सुबह करीब 9 बजे तक वह 3,519 वोटों से आगे चल रहे थे। इसके बाद जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, उनकी बढ़त लगातार बढ़ती गई। 11 राउंड की गिनती पूरी होने तक भाजपा उम्मीदवार की बढ़त 19,368 वोटों तक पहुंच गई थी। अंतिम राउंड तक यह अंतर बढ़कर 30 हजार से ज्यादा हो गया।

यह उपचुनाव भाजपा के वरिष्ठ नेता और गुजरात सरकार के पूर्व मंत्री योगेश पटेल के निधन के बाद खाली हुई सीट पर कराया गया था। योगेश पटेल लंबे समय तक मांजलपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे थे। वर्ष 2008 में मांजलपुर सीट बनने के बाद से ही वह लगातार इस क्षेत्र से विधायक चुने जाते रहे। इससे पहले वह रावपुरा विधानसभा क्षेत्र से भी लगातार पांच बार चुनाव जीत चुके थे।

योगेश पटेल का राजनीतिक सफर तीन दशक से भी अधिक लंबा रहा। वह अपने करियर में आठ बार विधायक चुने गए थे। उनके निधन के बाद भाजपा के सामने इस सीट को बचाए रखने की चुनौती थी, लेकिन पार्टी ने सतीश पटेल को मैदान में उतारकर यह सीट फिर से अपने नाम कर ली।

सतीश पटेल की उम्मीदवारी को लेकर शुरुआत में राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा थी, क्योंकि भाजपा ने अचानक उनका नाम घोषित किया था। हालांकि चुनाव परिणाम ने पार्टी के फैसले को सही साबित कर दिया। सतीश पटेल इससे पहले वडोदरा नगर निगम के पार्षद रह चुके हैं। उन्होंने नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया है। इसके अलावा वह वडोदरा जिला भाजपा इकाई के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

सतीश पटेल का सहकारी क्षेत्र में भी लंबा अनुभव रहा है। वह छानी नागरिक सहकारी बैंक के चेयरमैन रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने बड़ौदा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक और वडोदरा शुगर कोऑपरेटिव में निदेशक के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली है।

वहीं, कांग्रेस ने इस उपचुनाव में भीखा रबारी को उम्मीदवार बनाया था। भीखा रबारी गुजरात कांग्रेस के उपाध्यक्ष रह चुके हैं और पूर्व मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी सरकार में मंत्री भी रहे हैं। हालांकि वह भाजपा के मजबूत संगठन और चुनावी रणनीति के सामने टिक नहीं सके।

मांजलपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई को हुआ था। चुनाव के दौरान एक मतदान केंद्र के बाहर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हल्की कहासुनी की घटना सामने आई थी, लेकिन इसके अलावा मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही। इस सीट पर कुल मतदान प्रतिशत 37.50 फीसदी रहा, जो वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के 60.15 फीसदी मतदान की तुलना में काफी कम था।

निर्वाचन क्षेत्र में करीब 2.19 लाख मतदाता मतदान के लिए पात्र थे। चुनाव आयोग ने निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान के लिए 260 मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग, सीसीटीवी निगरानी और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए थे।

इस जीत के साथ भाजपा ने मांजलपुर विधानसभा सीट पर अपना राजनीतिक वर्चस्व कायम रखा है। वहीं, सतीश पटेल अब विधानसभा में इस क्षेत्र के नए प्रतिनिधि होंगे और दिवंगत योगेश पटेल की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी। गुजरात की राजनीति में यह जीत भाजपा के लिए आगामी चुनावों से पहले मनोबल बढ़ाने वाली मानी जा रही है।

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