गांधीनगर: गुजरात सरकार ने राज्य के मत्स्य उद्योग और समुद्र तटीय मछुआरों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद प्रवक्ता मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने बताया कि मत्स्य क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए 297.11 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है।

गिर सोमनाथ जिले के सायद राजपरा मत्स्य उतराई केंद्र के उन्नयन पर 188.71 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यहां करीब 3,100 सक्रिय मछुआरे और 347 नावें जुड़ी हैं। इस परियोजना के तहत 753 नावों की क्षमता वाला केंद्र, वार्फ दीवार का विस्तार, भूमि पुनर्भरण, सीसी सड़क एवं प्लेटफॉर्म, जाल मरम्मत शेड और ड्रेजिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

पोरबंदर मत्स्य बंदरगाह पर 94.97 करोड़ रुपये की लागत से ड्रेजिंग का कार्य किया जाएगा। यहां करीब 5,749 सक्रिय मछुआरे तथा 4,194 एफआरपी और ट्रॉलर नावें कार्यरत हैं। गुजरात समुद्री मंडल के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में ड्रेजिंग कर बंदरगाह की क्षमता और नावों की आवाजाही को सुगम बनाया जाएगा।

वलसाड जिले के फणसा मत्स्य उतराई केंद्र के विकास के लिए 13.43 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। यहां 1,318 सक्रिय मछुआरे हैं। केंद्र में कंक्रीट सतह, भूमि पुनर्भरण और सौर ऊर्जा आधारित एलईडी स्ट्रीट लाइट जैसी आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने कहा कि इन परियोजनाओं से मछली पकड़ने वाली नावों की 24 घंटे बंदरगाह में आवाजाही संभव होगी। इससे मछलियों के खराब होने की संभावना कम होगी और गुणवत्ता बरकरार रहने से मछुआरों को बाजार में बेहतर कीमत मिल सकेगी। मत्स्य निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा प्राप्त होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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