गांधीनगर: गुजरात की राजधानी गांधीनगर में बुधवार रात बड़ा हादसा हो गया। कुडासन इलाके में निर्माणाधीन कमर्शियल बिल्डिंग का एक हिस्सा अचानक गिर गया। हादसे के बाद कई मजदूर भारी मलबे में फंस गए। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड पुलिस और एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं और बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। देर रात तक 13 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाल लिया गया था।

घटना कुडासन इलाके में स्थित निर्माणाधीन कमर्शियल प्रोजेक्ट में रात करीब 9 बजे हुई। शुरुआती रिपोर्ट में करीब 10 से 15 मजदूरों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई थी। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत प्रशासन को सूचना दी।
क्रेन की टक्कर के बाद स्लैब गिरने की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार निर्माण कार्य के दौरान एक क्रेन के बिल्डिंग के हिस्से से टकराने के बाद छत का स्लैब गिरने की आशंका जताई गई है। हालांकि हादसे का वास्तविक कारण विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। घटनास्थल पर भारी लोहे और कंक्रीट का मलबा होने के कारण बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण रहा। फायर एवं इमरजेंसी सर्विस की टीमों ने उपकरणों की मदद से मलबे को हटाना शुरू किया।
13 लोगों को निकाला गया
स्थानीय विधायक अल्पेश ठाकोर ने बुधवार रात करीब 11:50 बजे जानकारी दी कि मलबे से 13 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। कम से कम पांच घायल मजदूरों को गांधीनगर के GMERS सिविल अस्पताल ले जाया गया। देर रात तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई थी। आपातकालीन सेवाओं की छह एंबुलेंस घायलों को अस्पताल पहुंचाने के काम में लगाई गई थीं। गांधीनगर फायर एंड इमरजेंसी सर्विस के कई बचाव वाहन और जिला पुलिस की टीमें भी घटनास्थल पर तैनात रहीं।
वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे घटनास्थल
हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। राज्य के वरिष्ठ मंत्री हर्ष संघवी भी घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव अभियान की जानकारी ली। शुरुआती रिपोर्टों में उन्हें लेकर अलग-अलग पदनाम दिए गए हैं इसलिए आधिकारिक स्थिति के अनुसार पदनाम लिखना उचित होगा।
हादसे के कारणों की होगी जांच
निर्माणाधीन बिल्डिंग में इतना बड़ा हिस्सा कैसे गिरा इसकी जांच की जाएगी। निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं यह भी जांच का अहम हिस्सा हो सकता है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता सभी प्रभावित मजदूरों की स्थिति स्पष्ट करना और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है। रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद तकनीकी जांच से दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
Tags: