गुरु रविदास जयंती समारोह को लेकर बोले तरुण चुघ, देशभर में हो रहे विशेष कार्यक्रम
Gujrat गुजरात। भाजपा सांसद तरुण चुघ ने संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती को लेकर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि देशभर में इस अवसर पर विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरु रविदास जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए जयंती समारोह की शुरुआत की थी। तरुण चुघ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 1 फरवरी को जालंधर स्थित गुरु रविदास डेरा, सचखंड बल्लां पहुंचकर गुरु रविदास जी को नमन किया और जन्म जयंती समारोहों की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी के विचार आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं।
भाजपा सांसद ने कहा कि गुरु रविदास जी ने समाज में समानता, भाईचारे और मानवता का संदेश दिया। उनके विचारों में सामाजिक एकता और सभी लोगों के सम्मान की भावना प्रमुख थी। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी का जीवन समाज सुधार और आध्यात्मिक चेतना का प्रेरणास्रोत रहा है। उन्होंने बताया कि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से उनके संदेशों और शिक्षाओं को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
तरुण चुघ ने कहा कि संत रविदास जी ने अपने विचारों के जरिए समाज में भेदभाव खत्म करने और सभी को समान अवसर देने का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी उनके सिद्धांत प्रासंगिक हैं और समाज को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन की ओर से संतों और महापुरुषों की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गुरु रविदास जी की जयंती के अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं।
सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा भारतीय संस्कृति, संत परंपरा और समाज सुधारकों के विचारों को सम्मान देने की बात करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी के आदर्शों को आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है। गुरु रविदास जी भारतीय संत परंपरा के प्रमुख संतों में से एक माने जाते हैं। उनके भक्ति आंदोलन और सामाजिक समानता के संदेश का व्यापक प्रभाव रहा है। उनकी शिक्षाएं आज भी लोगों को प्रेरणा देती हैं। तरुण चुघ ने कहा कि 650वीं जयंती के कार्यक्रम केवल उत्सव नहीं हैं, बल्कि संत रविदास जी के विचारों को समझने और उन्हें जीवन में अपनाने का अवसर भी हैं।