Bhilai. भिलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में एक दर्दनाक हादसे में 34 वर्षीय मजदूर की करंट लगने से मौत हो गई। घटना जामुल थाना क्षेत्र स्थित पीआईईसी प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी परिसर की है, जहां 30 अक्टूबर की रात ट्रेलर में सामान लोड करने के दौरान अचानक हाईटेंशन बिजली का तार टूटकर गिर गया। इसकी चपेट में आने से मजदूर किशन महतो गंभीर रूप से झुलस गया। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मृतक के परिजनों ने कंपनी प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। बाद में पुलिस की मौजूदगी में कंपनी प्रबंधन और परिजनों के बीच समझौता हुआ, जिसके तहत मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा और उसकी पत्नी को हर महीने 15 हजार रुपये देने पर सहमति बनी।
जानकारी के अनुसार, मृतक किशन महतो खुर्सीपार के गौतम नगर वार्ड क्रमांक 42 का निवासी था। वह पिछले छह से सात वर्षों से पीआईईसी प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में मजदूरी कर रहा था। कंपनी में लोहे से संबंधित सामान बनाने का काम होता है। शुक्रवार रात किशन अन्य कर्मचारियों के साथ ट्रेलर पर सामान लोड कर रहा था। इसी दौरान ऊपर से गुजर रहा हाईटेंशन तार अचानक टूटकर ट्रेलर पर गिर गया। बिजली का करंट फैलने से किशन उसकी चपेट में आ गया और गंभीर रूप से झुलस गया। हादसे के बाद कंपनी परिसर में अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारियों ने तार टूटने की आवाज सुनकर बाहर निकलकर स्थिति देखी। इसके बाद ट्रेलर को बाहर निकाला गया और घायल किशन को अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि गंभीर रूप से झुलसने के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में मातम छा गया।
मजदूर की मौत के बाद परिजनों ने किया हंगामा
शनिवार सुबह मृतक के परिजन और अन्य लोग कंपनी परिसर के बाहर एकत्र हो गए। उन्होंने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों का आरोप था कि हादसे के बाद किशन करीब 20 मिनट तक तड़पता रहा, लेकिन उसे समय पर उपचार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। उनका कहना था कि यदि तत्काल उचित सहायता मिलती तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने कंपनी में मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि काम के दौरान किशन के पास सुरक्षा के जरूरी उपकरण उपलब्ध नहीं थे। परिवार ने घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग की।
पुलिस की मौजूदगी में हुआ समझौता
हंगामे और विवाद की सूचना मिलने पर जामुल थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी की मौजूदगी में कंपनी प्रबंधन और मृतक के परिजनों के बीच बातचीत कराई गई। काफी चर्चा के बाद दोनों पक्षों में मुआवजे को लेकर सहमति बनी। समझौते के अनुसार, कंपनी प्रबंधन मृतक के पिता, पत्नी और बच्चों को कुल 25 लाख रुपये मुआवजा देगा। इसके अलावा किशन की पत्नी सुमन महतो को बच्चों के पालन-पोषण और पढ़ाई के लिए हर महीने 15 हजार रुपये देने का निर्णय लिया गया। समझौता होने के बाद परिजन कंपनी परिसर से लौट गए।
कंपनी प्रबंधन ने हादसे पर जताया दुख
पीआईईसी प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजर जय कुमार जैन ने बताया कि घटना से कंपनी प्रबंधन दुखी है। उन्होंने कहा कि मृतक के परिवार के साथ आपसी सहमति से 25 लाख रुपये मुआवजा और पत्नी को प्रतिमाह 15 हजार रुपये देने का समझौता हुआ है। मैनेजर के अनुसार, कंपनी में मजदूरों को सुरक्षा के लिए हेलमेट और जूते उपलब्ध कराए जाते हैं। घटना के समय ट्रेलर में सामान लोड किया जा रहा था। अचानक तार टूटने की आवाज सुनकर कर्मचारी बाहर निकले और घायल मजदूर को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
हाईटेंशन तार टूटने की वजह पर सवाल
इस हादसे के बाद कंपनी परिसर में बिजली के तारों की स्थिति और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हाईटेंशन तार अचानक कैसे टूटा और मजदूर की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था थी या नहीं, यह जांच का विषय है। हादसे के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई के सवाल पर कंपनी मैनेजर ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी के खिलाफ मामला दर्ज होने या विभागीय जांच के निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई है। इस घटना ने औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया है।