काष्ठ शिल्पकार पंडीराम मंडावी को मिला पद्मश्री पुरस्कार, विजय शर्मा ने दी बधाई
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Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर अंचल की मिट्टी में जन्मे और वहीं की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने वाले माटी पुत्र पंडीराम मंडावी को भारत सरकार ने पद्मश्री 2025 से सम्मानित किया है। यह सम्मान महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से प्रदान किया गया। यह गौरवपूर्ण क्षण न केवल पंडीराम मंडावी के लिए बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के लिए गर्व का विषय है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने उन्हें बधाई देते हुए कहा, “यह पुरस्कार बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं के लिए सम्मान है। पंडीराम मंडावी जैसे कारीगरों ने अपनी कला के ज़रिए प्रदेश को वैश्विक पहचान दिलाई है।”
जनजातीय वाद्य यंत्रों और काष्ठ शिल्प में अद्वितीय योगदान
पंडीराम मंडावी दशकों से बस्तर के पारंपरिक जनजातीय वाद्य यंत्रों के निर्माण में लगे हुए हैं। उनकी कारीगरी में वह गहराई और बारीकी देखने को मिलती है जो आज के आधुनिक युग में भी दुर्लभ हो गई है। वे बांस, लकड़ी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से मुरजा, तुंडा, ढोल, नगाड़ा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का निर्माण करते हैं, जिनका प्रयोग बस्तर की जनजातीय संस्कृति में उत्सव, पूजा और सामाजिक आयोजनों में किया जाता है। उनकी काष्ठ कला की भी पूरे देश में सराहना हो रही है। मंडावी द्वारा निर्मित लकड़ी की मूर्तियाँ, आदिवासी जीवनशैली को दर्शाती कलाकृतियाँ और वाद्य यंत्र अब केवल बस्तर के मेलों में नहीं बल्कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जैसे महानगरों की प्रदर्शनियों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रदर्शित होती हैं।
कला को बनाया आजीविका और पहचान का माध्यम
पंडीराम मंडावी ने अपनी कला के माध्यम से न केवल खुद के लिए पहचान बनाई, बल्कि अपने गाँव और आसपास के युवाओं को भी प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बनाया। उनके प्रयासों से आज दर्जनों युवा काष्ठ कला और वाद्य यंत्र निर्माण से जुड़कर आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं। वे कहते हैं, “यह पुरस्कार केवल मेरा नहीं है, यह बस्तर की हर उस हस्ती का है जो जंगलों की गोद में रहकर संस्कृति को जिंदा रखे हुए है। यह सम्मान हमारी पीढ़ियों को अपने मूल से जोड़कर रखने का संदेश देता है।”
राष्ट्रपति के हाथों मिला पद्मश्री, गर्व का क्षण
राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में महामहिम द्रौपदी मुर्मु ने पंडीराम मंडावी को जब पद्मश्री सम्मान प्रदान किया, तो वह दृश्य भावनात्मक और प्रेरणादायक था। एक ग्रामीण परिवेश से आने वाला शिल्पकार, जिसने कभी अपने हाथों से मिट्टी और लकड़ी को आकार देकर जीवन चलाया, आज देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में से एक का हकदार बना।
मुख्यमंत्री और राज्यभर में खुशी की लहर
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और संस्कृति मंत्री ने भी पंडीराम मंडावी को बधाई देते हुए कहा कि यह पुरस्कार प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बस्तर अंचल में भी इस घोषणा के बाद उत्साह की लहर दौड़ गई। सामाजिक संगठनों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने उनके गाँव में सम्मान समारोह आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है।