सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन खत्म, बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ी
छग
Pithora. पिथौरा। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में छोटे बच्चों को दी जाने वाली रोटावायरस वैक्सीन की कमी अब चिंता का विषय बन गई है। जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में यह जरूरी वैक्सीन पिछले दो से तीन महीनों से उपलब्ध नहीं है। राज्य स्तर से आपूर्ति रुकने के कारण स्वास्थ्य केंद्रों में स्टॉक खत्म पड़ा है, जिससे बच्चों के नियमित टीकाकरण अभियान पर असर पड़ रहा है। रोटावायरस वैक्सीन छोटे बच्चों को गंभीर दस्त, उल्टी और पेट के संक्रमण से बचाने के लिए दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह वैक्सीन शिशुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि रोटावायरस संक्रमण के कारण बच्चों में डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है और कई बार उन्हें अस्पताल में भर्ती तक करना पड़ सकता है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने मानी वैक्सीन की कमी
पिथौरा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, क्षेत्र में सालभर में लगभग 3700 डोज रोटावायरस ड्रॉप की जरूरत होती है। वहीं पूरे महासमुंद जिले में हर साल करीब 15 हजार डोज की आवश्यकता बताई जा रही है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी नागेश्वर राव ने बताया कि जिले में पिछले दो महीनों से रोटावायरस वैक्सीन का स्टॉक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि यह वैक्सीन राज्य स्तर से सप्लाई की जाती है और फिलहाल आपूर्ति नहीं होने के कारण स्वास्थ्य केंद्रों में इसकी उपलब्धता प्रभावित हुई है।
ड्रॉप्स के रूप में दी जाती है वैक्सीन
रोटावायरस वैक्सीन शिशुओं को डेढ़ माह, दो माह और साढ़े तीन माह की उम्र में तीन बार ड्रॉप्स के रूप में दी जाती है। यह इंजेक्शन नहीं बल्कि मुंह से पिलाई जाने वाली वैक्सीन है। यह वैक्सीन बच्चों को गंभीर डायरिया और उल्टी से बचाने में मदद करती है। इसके साथ ही शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी यानी डिहाइड्रेशन को रोकने में अहम भूमिका निभाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, समय पर टीकाकरण होने से बच्चों में संक्रमण का खतरा कम होता है और अस्पताल में भर्ती होने की संभावना भी घट जाती है।
गरीब और ग्रामीण परिवारों पर ज्यादा असर
वैक्सीन की कमी का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर हैं। जिन अभिभावकों को जानकारी है, वे निजी अस्पतालों और क्लीनिक में जाकर बच्चों को वैक्सीन लगवा रहे हैं। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निजी अस्पतालों में वैक्सीन लगवाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में कई बच्चे समय पर टीकाकरण से वंचित रह सकते हैं। स्वास्थ्य जानकारों का कहना है कि छोटे बच्चों में रोटावायरस संक्रमण तेजी से फैल सकता है। यदि समय पर बचाव नहीं किया गया तो गंभीर दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी समस्या बढ़ सकती है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
जिले में हर साल करीब 15 हजार डोज की जरूरत होने के बावजूद कई महीनों तक स्टॉक उपलब्ध नहीं होना स्वास्थ्य विभाग की आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। टीकाकरण कार्यक्रम की सफलता के लिए वैक्सीन की नियमित उपलब्धता बेहद जरूरी है। किसी भी महत्वपूर्ण वैक्सीन की आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल सकती है।
जल्द आपूर्ति की मांग
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और लोगों ने मांग की है कि रोटावायरस वैक्सीन की आपूर्ति जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए, ताकि जिले के सभी पात्र बच्चों को समय पर टीका मिल सके। अभिभावकों से भी अपील की जा रही है कि वे बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम को नियमित रखें। यदि सरकारी केंद्र में वैक्सीन उपलब्ध नहीं है तो स्वास्थ्य विभाग से जानकारी लेकर आगे की व्यवस्था करें। रोटावायरस वैक्सीन की यह कमी सिर्फ एक टीके की अनुपलब्धता नहीं है, बल्कि छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। समय रहते आपूर्ति व्यवस्था सुधारना जरूरी है, ताकि बच्चों को संक्रमण से बचाने की मुहिम प्रभावित न हो।