Kanker. कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक के दौरान उस समय विवाद की स्थिति बन गई, जब चार जिला पंचायत सदस्यों ने विकास कार्यों में अनदेखी और अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया। नाराज सदस्य बैठक बीच में छोड़कर सभाकक्ष से बाहर निकल गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में लंबे समय से विकास कार्यों की उपेक्षा की जा रही है, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में वे क्षेत्र की जनता के साथ सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को कांकेर जिला पंचायत के सभाकक्ष में सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में शामिल होने के लिए जिले के विभिन्न क्षेत्रों से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य पहुंचे थे। बैठक के दौरान विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी थी। इसी बीच चार जिला पंचायत सदस्यों ने अपनी उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया। बैठक से बाहर निकली महिला सदस्यों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनके क्षेत्रों में विकास योजनाओं को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से विभिन्न विकास कार्य लंबित हैं, लेकिन बार-बार मुद्दा उठाने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है।
जिला पंचायत सदस्य मृदुला भास्कर ने बताया कि वे काफी समय से स्थिति में सुधार होने की उम्मीद कर रही थीं। उन्होंने कई बैठकों में अपने क्षेत्र की समस्याओं और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दे उठाए, लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। इसी कारण उन्हें बैठक का बहिष्कार करने जैसा कदम उठाना पड़ा। मृदुला भास्कर ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते उनकी जिम्मेदारी अपने निर्वाचन क्षेत्र की जनता की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाना और विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है। जनता उन्हें इसी उम्मीद से चुनकर भेजती है कि क्षेत्र में सड़क, बुनियादी सुविधाओं और अन्य आवश्यक विकास योजनाओं पर काम होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिला पंचायत की बैठकों में समस्याएं उठाने के बावजूद उनके क्षेत्रों से संबंधित कार्यों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे जनप्रतिनिधियों के सामने भी मुश्किल स्थिति पैदा हो रही है, क्योंकि जनता उनसे विकास कार्यों की प्रगति के बारे में सवाल करती है। मृदुला भास्कर ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई बार उनके निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े प्रशासनिक कार्यों और गतिविधियों की सूचना तक उन्हें नहीं दी जाती। इससे वे अपने क्षेत्र में चल रही योजनाओं और कार्यों की जानकारी समय पर प्राप्त नहीं कर पातीं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब जिला पंचायत की बैठक में उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलता है, तब भी उनकी समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। सदस्यों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को समान रूप से अपनी बात रखने और अपने क्षेत्रों के विकास के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने का अवसर मिलना चाहिए। मृदुला भास्कर ने जिला पंचायत में राजनीतिक आधार पर भेदभाव किए जाने की आशंका भी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह कुछ क्षेत्रों के विकास कार्यों की अनदेखी हो रही है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासनिक और विकास संबंधी निर्णयों में पार्टीवाद हावी है। हालांकि, इन आरोपों पर जिला पंचायत प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
बैठक का बहिष्कार करने वाले सदस्यों ने कहा कि यदि आगामी दिनों में उनके क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और विकास कार्यों को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो वे जनता के साथ मिलकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल चार सदस्यों के बैठक छोड़ने के बाद जिला पंचायत की कार्यप्रणाली और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सदस्यों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी निर्वाचन क्षेत्रों में समान रूप से विकास कार्य कराए जाएं और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए।
Tags: