नशीले इंजेक्शन तस्करी में दो दोषियों को 10-10 साल की सजा

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Update: 2026-02-04 18:48 GMT
Surguja. सरगुजा। जिले में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ न्यायिक स्तर पर एक सख्त और महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट की अदालत ने नशीले इंजेक्शन की तस्करी के मामले में दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक पर 1-1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट अतुल कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने सुनाया, जिसे नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। मामले के अनुसार, 11 अक्टूबर 2024 को अंबिकापुर कोतवाली पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गंगापुर नाला के समीप रहने वाला ऑटो ड्राइवर प्रिंस उर्फ शाश्वत तिवारी (21 वर्ष) और उसका साथी रोहित कुमार पोर्ते (21 वर्ष), निवासी लखनपुर जमगला, लंबे समय से नशीले इंजेक्शन का अवैध कारोबार कर रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई और टीम गठित कर आरोपियों की तलाश शुरू की।

पुलिस को मुखबिर से यह भी जानकारी मिली थी कि दोनों आरोपी मौलवी बांध मोड़ के पास नशीले इंजेक्शन की सप्लाई करने आने वाले हैं। इसके बाद अंबिकापुर कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और ई-रिक्शा ऑटो क्रमांक CG-15-EV-2574 को रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान ऑटो से कुल 116 नशीले इंजेक्शन बरामद किए गए, जिन्हें एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है। बरामदगी के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया और उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से नशीले इंजेक्शन की खरीद-बिक्री कर रहे थे और युवाओं को नशे की लत लगाने में अहम भूमिका निभा रहे थे। इसके बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस द्वारा विवेचना पूरी कर 3 फरवरी 2026 को इस प्रकरण का चालान विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट अतुल कुमार श्रीवास्तव की अदालत में प्रस्तुत किया गया।

अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुलिस द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्य, बरामदगी, गवाहों के बयान और तकनीकी प्रमाणों को मजबूती से पेश किया। वहीं, बचाव पक्ष की दलीलों को अदालत ने पर्याप्त आधार न मानते हुए खारिज कर दिया। सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करते हुए विशेष न्यायाधीश ने आरोपी प्रिंस उर्फ शाश्वत तिवारी और रोहित कुमार पोर्ते को एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(सी) के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नशीले इंजेक्शन का अवैध कारोबार समाज, विशेषकर युवाओं के लिए
अत्यंत घातक
है और इस प्रकार के अपराधों में कठोर दंड दिया जाना आवश्यक है ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह के कृत्य को अंजाम देने का साहस न कर सके। अदालत ने दोनों दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाने के साथ ही प्रत्येक पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जुर्माने की राशि अदा नहीं की जाती है, तो आरोपियों को अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। इस फैसले को सरगुजा जिले में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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