चित्रकोट जलप्रपात का बदला रूप, मानसून में बढ़ी रौनक, सैलानियों की उमड़ी भीड़
छग
Jagdalpur. जगदलपुर। मानसून की शुरुआत के साथ ही छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात की खूबसूरती एक बार फिर निखरने लगी है। भारत के ‘मिनी नियाग्रा’ के नाम से मशहूर यह जलप्रपात बारिश के मौसम में अपने पूरे वैभव में नजर आने लगा है, जिससे यहां पर्यटकों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया है और चित्रकोट जलप्रपात का पानी, जो पहले अपेक्षाकृत साफ और सफेद दिखाई देता था, अब मटमैले रंग में बदल गया है। यह परिवर्तन मानसून के दौरान इसके प्राकृतिक स्वरूप का संकेत माना जाता है, जब जलप्रपात अपनी पूरी ताकत और गति के साथ बहता है।
जगदलपुर जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर लोहंडीगुड़ा क्षेत्र में स्थित चित्रकोट जलप्रपात इंद्रावती नदी पर बना हुआ है। करीब 90 फीट की ऊंचाई से गिरता हुआ पानी जब नीचे टकराता है, तो उसकी तेज गर्जना और उड़ती हुई फुहारें एक अद्भुत दृश्य उत्पन्न करती हैं। यह नजारा पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है और हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश से लोग यहां पहुंचते हैं। मानसून के इस मौसम में जलप्रपात का दृश्य और भी आकर्षक हो गया है, जिसके चलते बस्तर में पर्यटन गतिविधियां तेज हो गई हैं। स्थानीय व्यापारियों और होटल व्यवसायियों के अनुसार, इन दिनों पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल रहा है।
हालांकि, बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। किसी भी तरह की दुर्घटना से बचने के लिए जलप्रपात क्षेत्र में कई एहतियाती कदम उठाए गए हैं। प्रशासन ने बोटिंग सेवा को पूरी तरह से बंद कर दिया है, क्योंकि नदी का बहाव बेहद तेज हो गया है। इसके अलावा, जलप्रपात के निचले हिस्से में स्थित अस्थायी दुकानों को भी हटा दिया गया है ताकि पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। पर्यटकों को खतरनाक चट्टानों और गहरे पानी के करीब जाने से रोकने के लिए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा घेरा (फेंसिंग) लगाया गया है।
साथ ही, सुरक्षा बलों के जवानों की तैनाती की गई है, जो लगातार निगरानी कर रहे हैं और पर्यटकों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मानसून के दौरान चित्रकोट जलप्रपात में भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है। पार्किंग, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं को लेकर भी अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। दूर-दराज से आने वाले पर्यटक इस प्राकृतिक सौंदर्य का भरपूर आनंद ले रहे हैं। लोग मोबाइल और कैमरों में इस अद्भुत दृश्य को कैद कर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। कई पर्यटकों का कहना है कि मानसून में चित्रकोट का यह रूप बेहद आकर्षक और अविस्मरणीय होता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, हर वर्ष बारिश के मौसम में यहां पर्यटकों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, जिससे क्षेत्र में रोजगार और व्यापार के अवसर भी बढ़ते हैं। होटल, रेस्टोरेंट और स्थानीय हस्तशिल्प की बिक्री में भी तेजी देखी जाती है। चित्रकोट जलप्रपात की प्राकृतिक संरचना और जल प्रवाह इसे भारत के सबसे खूबसूरत झरनों में शामिल करता है। मानसून के दौरान इसका रूप पूरी तरह बदल जाता है, जो पर्यटकों के लिए एक विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है। फिलहाल प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें और निर्धारित क्षेत्रों में ही रहें, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।