आय से अधिक संपत्ति मामले में तत्कालीन DEO दोषी, कोर्ट ने सुनाई 4 साल की सजा
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Dantewada. दंतेवाड़ा। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में दंतेवाड़ा के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सुभाष गंजीर को विशेष न्यायालय ने दोषी करार दिया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामले में अदालत ने उन्हें 4 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी को 88.30 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने का दोषी माना है। विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, दंतेवाड़ा में मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष न्यायाधीश संतोष कुमार आदित्य ने 31 अगस्त 2026 को अपना फैसला सुनाया।
ACB ने 2017 में दर्ज किया था मामला
मामला एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से जुड़ा है। ACB ने सुभाष गंजीर के खिलाफ अपराध क्रमांक 04/2017 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ई) और 13(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया था। आरोप था कि शासकीय पद पर रहते हुए सुभाष गंजीर ने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की। जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि उनके और परिवार के सदस्यों के नाम पर ऐसी संपत्तियां अर्जित की गईं, जिनका उनकी वैध आय के मुकाबले उचित हिसाब नहीं था। ACB को मिली सूचना के सत्यापन के बाद 14 फरवरी 2017 को आरोपी के खिलाफ विधिवत अपराध पंजीबद्ध किया गया था।
तीन स्थानों पर ACB ने की थी तलाशी
मामला दर्ज होने के बाद ACB ने जांच आगे बढ़ाई। विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त करने के बाद 15 फरवरी 2017 को ACB की टीम ने तत्कालीन DEO से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी और तलाशी की कार्रवाई की। ACB टीम ने दंतेवाड़ा स्थित आरोपी के शासकीय आवास के अलावा वृंदावन कॉलोनी, जगदलपुर तथा उनके पैतृक ग्राम कोटपाड़, जिला कोरापुट (ओडिशा) में भी तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया गया। ACB ने आरोपी की आय, संपत्ति और खर्च से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जांच की।
जांच के बाद कोर्ट में पेश किया गया अभियोग पत्र
ACB ने मामले की विस्तृत जांच पूरी करने के बाद आरोपी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की। इसके बाद जांच में सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अभियोग पत्र तैयार कर विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, दंतेवाड़ा में प्रस्तुत किया गया। मामले में न्यायालय के समक्ष अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर विचारण हुआ। सुनवाई के दौरान आरोपी की संपत्ति और आय के बीच के अंतर से जुड़े तथ्यों पर न्यायालय ने विचार किया।
88.30 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति का दोष
विचारण के बाद विशेष न्यायाधीश संतोष कुमार आदित्य ने 31 अगस्त 2026 को फैसला सुनाते हुए सुभाष गंजीर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ई) और 13(2) के तहत दोषी माना। न्यायालय ने आरोपी द्वारा 88.30 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति अर्जित किए जाने को आधार मानते हुए उन्हें 4 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला सरकारी पद पर रहते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामलों में भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ACB की जांच और उसके बाद हुई न्यायिक प्रक्रिया के पश्चात मामले में अदालत ने अपना निर्णय सुनाया।