गरिमा गृह में ट्रांसजेंडर समुदाय ने मनाया रक्षाबंधन
राखी बांधकर साझा किया भाई-बहन का प्रेम
Raipur. रायपुर। भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और अपनत्व का पर्व रक्षाबंधन रायपुर के सरोना स्थित ट्रांसजेंडर शेल्टर होम ‘गरिमा गृह’ में भी भावनात्मक माहौल के बीच मनाया गया। इस अवसर पर ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों ने एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर भाई-बहन के रिश्ते की भावनाओं को साझा किया। कार्यक्रम में प्रेम, अपनत्व और परिवार जैसी भावनाओं की झलक देखने को मिली। रक्षाबंधन समारोह का सबसे भावुक क्षण उस समय आया, जब ट्रांस महिला निक्की ध्रुव ने अपने भाई स्पर्श कश्यप की कलाई पर राखी बांधी। राखी बांधने के बाद दोनों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। इस दौरान मौजूद अन्य ट्रांसजेंडर सदस्यों ने भी एक-दूसरे को राखी बांधकर पर्व की खुशियां साझा कीं। गरिमा गृह में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल रक्षाबंधन का पर्व मनाना नहीं, बल्कि समुदाय के सदस्यों के बीच पारिवारिक जुड़ाव, प्रेम और अपनत्व की भावना को मजबूत करना भी रहा। कई लोगों के लिए यह अवसर भावनात्मक रूप से खास रहा, क्योंकि रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते को याद करने और उसे महसूस करने का पर्व माना जाता है।
नवनियुक्त ट्रांसजेंडर आरक्षक भी हुए शामिल
कार्यक्रम में नवनियुक्त ट्रांसजेंडर आरक्षक भी गरिमा गृह पहुंचे। उन्होंने समुदाय के सदस्यों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। उनके शामिल होने से समारोह और भी खास हो गया। समुदाय के सदस्यों ने उनका स्वागत किया और उनके साथ पर्व की खुशियां साझा कीं। इस दौरान रक्षाबंधन को लेकर समुदाय के सदस्यों ने अपने अनुभव भी साझा किए। पॉपी देवनाथ ने कहा कि रक्षाबंधन उनके लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्यार और अपनत्व को महसूस करने का दिन है। गरिमा गृह में इस तरह पर्व मनाने से परिवार जैसा एहसास होता है। वहीं विद्या राजपूत ने कहा कि कई ट्रांसजेंडर लोगों के जीवन में परिवार और भाई-बहनों से दूरियां आई हैं, लेकिन भाई-बहन के लिए प्रेम की भावना हमेशा बनी रहती है। उनके अनुसार गरिमा गृह में रक्षाबंधन मनाना उसी प्रेम और अपनत्व को फिर से महसूस करने का खूबसूरत अवसर है।
परिवार और अपनत्व का संदेश
रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके सुखी एवं सुरक्षित जीवन की कामना करती है। भाई भी बहन के प्रति अपने स्नेह और जिम्मेदारी का संकल्प लेता है। हालांकि बदलते समय के साथ रक्षाबंधन का स्वरूप भी व्यापक हुआ है और अब यह पर्व प्रेम, सम्मान तथा पारिवारिक जुड़ाव की भावना को व्यक्त करने का माध्यम बन गया है। गरिमा गृह में आयोजित समारोह ने भी इसी व्यापक भावना को सामने रखा। यहां समुदाय के सदस्यों ने एक-दूसरे के साथ राखी बांधकर यह संदेश दिया कि प्रेम, रिश्ते और अपनत्व की भावनाएं किसी पहचान या सामाजिक परिस्थिति की सीमाओं में बंधी नहीं होतीं। कार्यक्रम के दौरान सभी ने एक-दूसरे को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। गरिमा गृह में मनाया गया यह पर्व समुदाय के सदस्यों के लिए भावनात्मक जुड़ाव, सम्मान और परिवार जैसी अनुभूति का अवसर बना।