हिड़मा समेत 13 माओवादियों की मौत को बताया फर्जी एनकाउंटर

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Update: 2025-11-27 16:08 GMT
Jagdalpur. जगदलपुर। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता विकल्प ने एक प्रेस नोट जारी करते हुए आंध्रप्रदेश पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रवक्ता का कहना है कि हाल ही में हुई मुठभेड़ में नक्सली लीडर हिड़मा समेत 13 माओवादियों की मौत को फर्जी एनकाउंटर बताया जा सकता है। संगठन ने इस घटना के विरोध में 30 नवंबर को छत्तीसगढ़ बंद की घोषणा की है। प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि आंध्रप्रदेश पुलिस ने हाल ही में माओवादी नेता देवजी को गिरफ्तार किया है, लेकिन अब तक इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। उनके अनुसार, देवजी सहित करीब 50 माओवादी गुप्त स्थानों पर हिरासत में हैं और अदालत में पेश नहीं किए गए हैं। यह कथित तौर पर कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है।

संगठन का यह भी कहना है कि पुलिस की हालिया कार्रवाई में हिड़मा समेत 13 माओवादियों की मौत हुई, जिसे फर्जी एनकाउंटर के रूप में देखा जा रहा है। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी ने इसकी न्यायिक जांच की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर पुलिस प्रशासन ने इन मामलों में पारदर्शिता नहीं दिखाई, तो वे भविष्य में कड़े विरोध और आंदोलन करेंगे। प्रवक्ता ने कहा कि नक्सली संगठन की यह चेतावनी केवल पुलिस की गुप्त कार्रवाइयों और फर्जी एनकाउंटर के विरोध में है। संगठन ने 30 नवंबर को छत्तीसगढ़ बंद की घोषणा करते हुए राज्यभर के लोगों से शांति पूर्ण प्रदर्शन और सरकारी कार्यालयों पर ध्यान केंद्रित न करने का आह्वान किया। नक्सलियों का आरोप है कि मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने वास्तविक स्थिति को छुपाने का प्रयास किया।

इसमें मृतकों के परिवारों और स्थानीय लोगों को कोई सूचित नहीं किया गया। संगठन का कहना है कि यदि सरकारी एजेंसियां ऐसे मामलों में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित नहीं करती हैं, तो यह भविष्य में कानून और व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। संगठन की तरफ से जारी प्रेस नोट में यह भी कहा गया कि माओवादी लीडर देवजी सहित हिरासत में लिए गए अन्य नेता को कोर्ट में पेश नहीं किया जाना गंभीर मामला है। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का मानना है कि पुलिस प्रशासन गुप्त तरीके से गिरफ्तारियों और फर्जी मुठभेड़ के जरिए नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, जो लोकतंत्र और कानूनी प्रक्रिया के लिए चुनौती है। प्रवक्ता ने अंत में चेतावनी दी कि 30 नवंबर को होने वाले छत्तीसगढ़ बंद के दौरान कोई भी हिंसा या तोड़फोड़ नहीं होगी और इसे केवल विरोध और जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जाएगा। संगठन ने स्थानीय जनता से सहयोग की अपील की है और राज्य प्रशासन को इस मामले में न्यायिक जांच कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की सिफारिश की है।
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