भ्रष्ट्र वन विभाग DFO की काली करतूत, छत्तीसगढ़ के मूल निवासी को नौकरी से कर रहे वंचित

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Update: 2025-09-18 09:33 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के तहत हल्का वाहन चालक (ड्राइवर) भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2023 में इस भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे, लेकिन अब जब नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंची है तो सतनामी समाज और छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के युवाओं ने भर्ती में भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उम्मीदवारों का कहना है कि डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) स्तर के अधिकारी मिलीभगत कर बाहरी और आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को नौकरी देने की तैयारी में हैं, जबकि छत्तीसगढ़ के पात्र युवाओं को दरकिनार किया जा रहा है।

जब जनता से रिश्ता ने प्रभारी DFO तेजस सेखर से बात किया गया। उन्होंने कहा है कि मैं प्रभारी हू ये मामला मेरे संज्ञान में नहीं है मैं इसकी जांच करवाता हूं और उचित कार्रवाई करता हूं। वही दूसरी ओर लोकनाथ पटेल DFO जिनके अधीन ये भर्ती प्रक्रिया चल रही है वे अपना फोन जिसका नंबर (9630494162) है। अधिकारी द्वारा फोन उठाना तो दूर की बात है। अपने फोन को किसी और को देकर भ्रष्टाचार की भर्ती को भी गंभीरता से नहीं ले रहे है और सीधा अपने चपरासी के हाथ में फोन थमा दिया। गौरतलब है कि सबसे भ्रष्टम DFO लोकनाथ पटेल ने आने वाली 4 तारीख तक छुट्टी ले रखा है। वही अपने क्लासमेट महिला अधिकारी के साथ मिलकर भ्रष्टाचार के नए-नए आयाम स्थापति कर रहे है और विभाग में जोरों से चर्चा है कि वन मंत्री भी इनका कुछ बिगाड़ नहीं सकते और ये अपने सहपाठी महिला अधिकारी के देख-रेख में और सभी भर्ती प्रक्रिया को परदे के पीछे से बैठकर कर रहे है। छत्तीसगढ़ वन विभाग के DFO 
लोकनाथ पटेल के बहुत सारे घपले घोटाले के मामलें अब धीरे-धीरे सामने आने लगे है और वन विभाग को इस भ्रष्टाचार के मामलों पर जल्द आंकलन करने की जरुरत है। जनता से रिश्ता विगत 12 वर्षों से वन विभाग के घपले-घोटाले को उजागर करता आ रहा है और अब लगातार एक सीरीज़ के जैसे वन विभाग में चल रहे बड़े-बड़े घपले घोटालों को उजागर करता रहेगा।

जैसे कि उदाहरण 4 उमीदवार बाहरी होने के साथ-साथ दुष्कर्म के आलावा फर्जी जाति प्रमाण पत्र या मूल निवासी एवं बिना अनुभव होने का सीधा पुख्ता सुबूत के साथ छत्तीसगढ़ के मूल निवासी सतनामी उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है। आरोपी उमीदवार गण इस प्रकार है।
दिलीप मंडल- (फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र)
धनेश्वर ढीढी- (पाक्सो एक्ट) अपराध दर्ज है।
हर्षवर्धन भावे और रोशन भावे- छत्तीसगढ़ के मूल निवासी नहीं है और अनुसूचित में भी नहीं आते है।


भर्ती प्रक्रिया और विवाद की शुरुआत
वन विभाग ने 22 मई 2023 से 11 जून 2023 तक आवेदन लेकर हल्का वाहन चालक के 4 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। रायपुर वन मंडल के अंतर्गत इस भर्ती का आदेश जारी हुआ। नियमों के मुताबिक इस भर्ती में स्थानीय उम्मीदवारों, विशेषकर अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के पात्र आवेदकों को वरीयता दी
जानी
थी। लेकिन भर्ती के अंतिम चरण में सतनामी समाज के युवाओं ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और मिलीभगत के जरिए बाहरी राज्यों से आए, फर्जी दस्तावेज़ रखने वाले और यहां तक कि आपराधिक मामलों में लिप्त उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने की साजिश रची जा रही है।

आरोपों के घेरे में दो DFO
शिकायत करने वाले उम्मीदवारों ने सीधे तौर पर दो अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं।
पहला नाम लोकनाथ पटेल (DFO) का सामने आया है, जो भर्ती की प्रक्रिया देख रहे थे।
दूसरा नाम तेजस शेखर (DFO) का लिया गया है, जो लोकनाथ पटेल की जगह उस समय भर्ती कार्य को संभाल रहे थे।
आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने मिलीभगत कर सतनामी समाज और छत्तीसगढ़ के मूल निवासी युवाओं की उम्मीदों को तोड़ते हुए ऐसे नामों की सूची तैयार की है, जिनके चयन पर भारी-भरकम लेन-देन हुआ है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप – “भ्रष्टाचार का खुला खेल”
जनता से रिश्ता कार्यालय में आए सतनामी समाज के युवाओं ने लिखित शिकायत में कहा कि इस भर्ती में लगभग 15 से 20 लाख रुपए तक की घूस मांगी जा रही है। उनके मुताबिक, बाहरी और फर्जी जाति-निवास प्रमाण पत्र रखने वाले उम्मीदवार अधिकारियों को मोटी रकम देकर चयनित हो रहे हैं। जबकि गरीब और मूल निवासी उम्मीदवार, जिनके पास इतना पैसा नहीं है, उन्हें लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। युवाओं ने यह भी कहा कि इस भर्ती के नाम पर अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ के साथ दोगलापन किया है। राज्य के संविधान प्रदत्त अधिकारों और आरक्षण के प्रावधानों को ठेंगा दिखाते हुए बाहरी उम्मीदवारों को नौकरी दी जा रही है।

आपत्ति और शिकायत का सिलसिला
जब चयन सूची प्रकाशित की गई तो सतनामी समाज के युवाओं ने तुरंत मुख्य वन संरक्षक (CCF) और भर्ती प्रक्रिया संचालित कर रहे अधिकारियों के पास आपत्ति दर्ज कराई। आपत्ति में स्पष्ट कहा गया कि जिन उम्मीदवारों का चयन किया जा रहा है वे बाहरी राज्य के हैं और नकली SC प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं। इसके साथ ही उनका नाम, रोल नंबर और फोटोग्राफ तक संलग्न कर आपत्ति दर्ज की गई। शिकायत करने वाले युवाओं ने आरोप लगाया कि हर्षवर्धन भावे (रोल नंबर 3904), रोशन भावे (रोल नंबर 3752) और दानेश्वर कुमार डी डी (रोल नंबर 3524) – इन तीन नामों पर अधिकारियों ने अंतिम मुहर लगाने की तैयारी कर ली है। ये वही उम्मीदवार बताए जा रहे हैं जिन पर फर्जी दस्तावेज़ और आपराधिक पृष्ठभूमि के आरोप हैं।

उम्मीदवारों का दर्द – “हम कहां से लाएं लाखों रुपए?”
सतनामी समाज के युवाओं का कहना है कि वे छत्तीसगढ़ के स्थायी निवासी और गरीब वर्ग से आते हैं। सरकारी नौकरी पाना उनका सपना है, लेकिन नौकरी पाने के लिए 15-20 लाख रुपए रिश्वत देना उनके बस की बात नहीं है। उनका कहना है कि भर्ती के नाम पर खुलेआम सौदेबाजी हो रही है। जो पैसे दे सकते हैं, वे नौकरी पा रहे हैं, और जो नहीं दे सकते, उन्हें नियमों और अधिकारों के बावजूद बाहर कर दिया जा रहा है।

आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को लाभ?
शिकायतकर्ताओं ने यह भी सनसनीखेज आरोप लगाया है कि जिन उम्मीदवारों को नौकरी देने की तैयारी की जा रही है, उनमें से कुछ पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यहां तक कि एक उम्मीदवार पर पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत केस दर्ज होने का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है। युवाओं का कहना है कि अपराधियों को सरकारी नौकरी में भर्ती कराना न केवल अन्याय है बल्कि कानून और संविधान का भी मजाक उड़ाना है।

मुख्यमंत्री और वन मंत्री तक पहुंची शिकायत
मामले की गंभीरता को देखते हुए युवाओं ने यह शिकायत मुख्य वन संरक्षक, मुख्यमंत्री और वन मंत्री तक पहुंचाई है। इसके अलावा पुलिस कप्तान को भी इस संदर्भ में अवगत कराया गया है। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं की गई तो छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के अधिकारों का स्थायी हनन होगा।

DFO पर “दादागिरी” का आरोप
युवाओं ने DFO लोकनाथ पटेल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायतों को दरकिनार कर वे जबरदस्ती बाहरी उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने पर अड़े हुए हैं। आरोप है कि वे दादागिरी दिखाते हुए कह रहे हैं कि चाहे जितनी शिकायत कर लो, चयन उन्हीं का होगा जिन्हें पहले से तय कर लिया गया है।

भर्ती प्रक्रिया पर सवाल
विज्ञापन में छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों और SC वर्ग के उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का उल्लेख था।
भर्ती के दौरान दावा-आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान था, लेकिन आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया गया।
चयन सूची में बाहरी राज्यों और संदिग्ध दस्तावेज़ वाले उम्मीदवारों का नाम शामिल कर लिया गया।
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चयन की कोशिश की जा रही है।

युवाओं की अपील – “हमें न्याय दिलाया जाए”
सतनामी समाज और छत्तीसगढ़ के स्थायी उम्मीदवारों ने सरकार से मांग की है कि इस भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए। फर्जी जाति-निवास प्रमाण पत्र वालों को तुरंत निरस्त किया जाए और भ्रष्ट अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो। युवाओं ने कहा कि यदि उनकी आवाज़ अनसुनी की गई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। यह मामला केवल एक भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। यह सवाल उठाता है कि आखिर क्यों हर भर्ती में भ्रष्टाचार और लेन-देन की शिकायतें सामने आती हैं? क्या सरकारी नौकरी केवल पैसों से तय होगी? क्या स्थानीय और गरीब युवाओं का सपना यूं ही चकनाचूर होता रहेगा? यदि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो न केवल युवाओं का भरोसा टूटेगा बल्कि समाज में निराशा का वातावरण फैलेगा।
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