बीएसपी रिटेंशन स्कीम और निजीकरण के विवाद ने राजनीति में उठाया ताप, सांसद-विधायक ने उठाया जनसरोकार

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Update: 2025-12-16 17:06 GMT
Durg. दुर्ग। भिलाई टाउनशिप के बीएसपी आवासों को लेकर लागू किए गए नए गाइडलाइन और उससे जुड़े विवादित मुद्दों ने शहर की राजनीति में हलचल मचा दी है। रिटेंशन स्कीम, मैत्रीबाग स्कूलों के निजीकरण, बीएसपी कर्मचारियों के अधिकार, लीज़ रिन्यूअल, लाइसेंसी और थर्ड पार्टी अलॉटी जैसे सवालों ने बीएसपी कर्मियों, व्यापारियों और राजनीतिक दलों को सीधे तौर पर जोड़ दिया है। बीएसपी टाउनशिप में रिटेंशन स्कीम के तहत रिटायरमेंट के बाद भी आवासों में रहने वाले 1500 से अधिक सेवानिवृत्त कर्मचारी लंबे समय से अपने अधिकारों और लीज के नियमों की दिशा में संघर्ष कर रहे हैं। वर्षों से किराया देने के बावजूद, छठवीं लीज की उम्मीद रखने वाले कई कर्मियों का नाम अब भिलाई नगर मतदाता सूची से कटने की कगार पर पहुंच चुका है। बीएलओ द्वारा एसआईआर फॉर्म न देने जैसी बाधाओं ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
बीएसपी कर्मियों और लीज धारकों ने अब बीएसपी प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और सांसद, विधायक और पूर्व मंत्रियों के पास अपनी शिकायतों को लेकर पहुंच रहे हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय और भाजपा सांसद विजय बघेल ने बीएसपी के डीआईसी से बैठक कर रिटेंशन, व्यापारियों के लीज रिन्यूअल, निजीकरण, कर्मचारियों की सुरक्षा, 20 प्रतिशत श्रमिकों की छंटनी, विद्युत विभाग को राज्य सरकार को सौंपने और लीज धारकों के जर्जर आवासों की मरम्मत जैसे मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने सख्त लहजे में 10 दिनों के भीतर सार्थक निर्णय लेने को कहा। सांसद विजय बघेल और पूर्व अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय ने चेताया कि यदि प्रबंधन ने समय पर सही निर्णय नहीं लिया तो जनआक्रोश बढ़ सकता है।
इसी बीच, विधायक देवेंद्र यादव ने भी टाउनशिप में रिटेंशनधारियों, बीएसपी कर्मचारियों और व्यापारियों की समस्याओं को लेकर सक्रियता दिखाई है। उन्होंने 20 और 21 दिसंबर को दो दिन के उपवास और गांधीवादी धरना प्रदर्शन की घोषणा की है। इस कदम ने शहर की राजनीति को और गर्मा दिया है। वहीं, टाउनशिप के व्यापारी और लीजधारक लगातार अपने संपर्क और बैठक अभियान में जुटे हुए हैं। वे चाहते हैं कि बीएसपी प्रबंधन जल्द ही रिटेंशन स्कीम, लीज रिन्यूअल और निजीकरण से जुड़े मामलों में स्पष्टता लाए। उनके अनुसार अगर समाधान नहीं निकला तो व्यापार और नागरिक जीवन पर असर पड़ेगा। इस विवाद ने यह भी उजागर किया है कि बीएसपी टाउनशिप में लंबे समय से चल रहे नियम और गाइडलाइन कितनी जटिलता और असमंजस पैदा कर रहे हैं। कई सेवानिवृत्त कर्मचारी वर्षों से अधिक किराया चुका चुके हैं, बावजूद इसके उन्हें उचित सुविधा या सरकारी प्रक्रिया तक पहुंच नहीं मिली है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो, सांसद विजय बघेल और पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय की सक्रियता से टाउनशिप मुद्दा राजनीतिक एजेंडे में भी शामिल हो गया है। वहीं, विधायक देवेंद्र यादव का धरना और उपवास नागरिक समर्थन जुटाने का तरीका माना जा रहा है। यदि बीएसपी प्रबंधन संपूर्ण निर्णय और समाधान नहीं लाता है, तो टाउनशिप में जनआक्रोश और विरोध और भी बढ़ सकता है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि बीएसपी रिटेंशन स्कीम और निजीकरण केवल आवासीय विवाद नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक तनाव का कारण बन रहा है। इस पूरे मामले में अब शहर के नागरिक, कर्मचारी और व्यापारियों की निगाहें बीएसपी प्रबंधन और स्थानीय नेताओं पर टिकी हुई हैं। आने वाले 10 दिनों के भीतर किसी भी तरह का सार्थक निर्णय टाउनशिप की समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।
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