Raipur रायपुर। दहेज जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रहार और पौराणिक कथाओं की रंगमंचीय अभिव्यक्ति के साथ राजधानी में तीन दिवसीय ‘रंग परब नाट्य श्रृंखला’ का भव्य शुभारंभ हुआ। संस्कृति विभाग द्वारा मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में आयोजित नाट्य श्रृंखला 9 से 11 सितंबर तक चलेगी। इसमें प्रतिदिन दो नाटकों का मंचन किया जाएगा। शुभारंभ अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन नहीं बल्कि समाज का जीवंत दर्पण है। रंगमंच सामाजिक सरोकारों, संघर्षों और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाता है।
श्रृंखला की पहली प्रस्तुति ‘मया के मुंदरी’ रही। रिखी क्षत्रिय एवं समूह की प्रस्तुति ने दहेज प्रथा पर तीखा प्रहार किया। नाटक में दिखाया गया कि किस तरह धन और संपत्ति का लालच विवाह जैसे पवित्र रिश्ते को सौदे में बदल देता है। कहानी में दहेज के लालची पिता के विपरीत बेटा और उसकी मां इस कुरीति के खिलाफ खड़े होते हैं। युवक आखिरकार दहेज का विरोध करते हुए गरीब परिवार की लड़की से विवाह स्वीकार करता है। ग्रामीण परंपराओं के बीच संपन्न विवाह के जरिए नाटक ने संदेश दिया कि विवाह आर्थिक लेन-देन नहीं बल्कि विश्वास, सम्मान और समानता पर आधारित रिश्ता है।
दूसरी प्रस्तुति ‘हरित सागर’ रही, जिसके लेखक एवं निर्देशक किशोर वैभव हैं। 7वीं शताब्दी की संस्कृत उत्तरकथा पर आधारित नाटक में भगवान शिव, माता पार्वती और जलंधर से जुड़े पौराणिक प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया गया। आयोजन में कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार विजय मिश्रा, फिल्म बोर्ड सदस्य प्रसन्ना अवस्थी और समाजसेवी उदयभान चौहान सहित कला एवं साहित्य जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे। तीन दिनों तक चलने वाले ‘रंग परब’ के जरिए सामाजिक चेतना, संस्कृति, मानवीय संवेदनाओं और पौराणिक कथाओं को रंगमंच से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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