Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार करने के बाद मंगलवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रायपुर जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया। अदालत ने ED की मांग स्वीकार करते हुए रामगोपाल अग्रवाल को पांच दिन की कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया है। अब जांच एजेंसी अगले पांच दिनों तक उनसे शराब घोटाले और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ करेगी। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें 17 अगस्त 2026 को दोबारा अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, रामगोपाल अग्रवाल की पेशी ED की विशेष अदालत में होनी थी, लेकिन विशेष न्यायाधीश के अवकाश पर होने के कारण मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय में हुई। ED ने अदालत के सामने अपनी दलील रखते हुए रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ के लिए कस्टोडियल रिमांड की मांग की। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में कथित वित्तीय लेन-देन, शराब कारोबार से जुड़े नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के लिए उनसे विस्तृत पूछताछ जरूरी है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पांच दिन की रिमांड मंजूर कर दी।
रिमांड के दौरान ED शराब घोटाले में रामगोपाल अग्रवाल की कथित भूमिका, विभिन्न स्तरों पर हुए वित्तीय लेन-देन और मामले से जुड़े अन्य लोगों के साथ उनके संपर्कों को लेकर पूछताछ कर सकती है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि कथित तौर पर अवैध तरीके से अर्जित रकम का लेन-देन किस माध्यम से हुआ और उसका इस्तेमाल कहां किया गया। रामगोपाल अग्रवाल को कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी जिला न्यायालय पहुंचे। उन्होंने रामगोपाल अग्रवाल से मुलाकात की। ED की कार्रवाई को लेकर भूपेश बघेल ने जांच एजेंसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसके पास कोई ठोस सबूत नहीं है और कार्रवाई केवल परेशान करने के लिए की जा रही है। उन्होंने कथित गवाहों को लेकर भी सवाल उठाए और कार्रवाई को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।
छत्तीसगढ़ के शराब कारोबार में कथित घोटाले को लेकर ED और राज्य की अन्य जांच एजेंसियां लंबे समय से जांच कर रही हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि शराब कारोबार में करीब 3,400 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। इस मामले में कई आरोपियों और उनसे जुड़े लोगों से पूछताछ तथा कार्रवाई पहले भी हो चुकी है। शराब घोटाले के साथ-साथ कोयला लेवी और अन्य कथित आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े मामलों में भी जांच चलती रही है। जानकारी के अनुसार, कोयला घोटाला मामले में रिमांड अवधि पूरी होने के बाद EOW-ACB ने रामगोपाल अग्रवाल को शराब घोटाला मामले में भी गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजा गया। जांच एजेंसी ने रविवार को उन्हें सेंट्रल जेल में शराब घोटाला मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे अनवर ढेबर के सामने बैठाकर पूछताछ भी की थी। अब ED की पांच दिन की कस्टोडियल रिमांड के दौरान जांच को आगे बढ़ाने की तैयारी है।
रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी से पहले भी यह मामला लंबे समय से जांच एजेंसियों के घेरे में रहा है। कांग्रेस नेता करीब तीन साल तक फरार बताए जा रहे थे। इसके बाद 8 जुलाई 2026 को उन्होंने EOW कार्यालय पहुंचकर सरेंडर किया था। सरेंडर के बाद उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया और उन्हें अदालत में पेश किया गया। अदालत ने शुरुआत में 9 जुलाई से 17 जुलाई तक पुलिस रिमांड मंजूर की थी। पुलिस रिमांड की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें दोबारा अदालत में पेश किया गया। इसके बाद जांच एजेंसी को आगे की पूछताछ के लिए उनकी कस्टडी मिली। अब शराब घोटाले से जुड़े मामले में ED की कार्रवाई के बाद उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
ED की जांच का अगला चरण अब पांच दिन की कस्टोडियल रिमांड के दौरान आगे बढ़ेगा। इस दौरान एजेंसी कथित घोटाले में धन के प्रवाह, वित्तीय दस्तावेजों, लेन-देन और अन्य संबंधित व्यक्तियों से संभावित कड़ियों की पड़ताल कर सकती है। जांच एजेंसी यह भी जानने का प्रयास करेगी कि शराब कारोबार से जुड़े कथित अवैध वित्तीय नेटवर्क में रामगोपाल अग्रवाल की क्या भूमिका रही और किन लोगों के साथ उनके कथित संपर्क थे। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद रामगोपाल अग्रवाल ED की हिरासत में हैं। 17 अगस्त को रिमांड पूरी होने के बाद उन्हें फिर अदालत में पेश किया जाएगा। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि उन्हें आगे न्यायिक हिरासत में भेजा जाता है या जांच एजेंसी को आगे की पूछताछ के लिए अतिरिक्त कस्टडी मिलती है। मामले में ED की आगामी कार्रवाई और पूछताछ से शराब घोटाले की जांच से जुड़े कई नए तथ्य सामने आने की संभावना है।