लोकसभा में मीडिएशन काउंसिल ऑफ़ इंडिया पर सवाल, सरकार ने बताया क्रियान्वयन का रोडमैप
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New Delhi/Raipur. नई दिल्ली/रायपुर। देश में न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, सुलभ और तेज़ बनाने की दिशा में वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution – ADR) तंत्र को मजबूत करने पर केंद्र सरकार का फोकस लगातार बढ़ रहा है। इसी संदर्भ में लोकसभा में रायपुर से सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मीडिएशन काउंसिल ऑफ़ इंडिया (MCI) की ऑपरेशनल स्थिति और इसके पूर्ण क्रियान्वयन के रोडमैप को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाया। सांसद ने कहा कि जैसे-जैसे न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम करने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं, ADR विशेषकर मीडिएशन आगे बढ़ने का प्रभावी रास्ता बन सकता है।
लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मीडिएशन एक्ट, 2023 की प्रगति पर विस्तृत जानकारी दी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश में “मजबूत और असरदार मीडिएशन इकोसिस्टम” तैयार करने के लिए आवश्यक कानूनी ढांचा पहले से मौजूद है। उन्होंने बताया कि काउंसिल के प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण नियम जून 2024 में अधिसूचित किए जा चुके हैं, जिससे संस्थागत व्यवस्था को गति मिली है। सरकार के अनुसार, मीडिएशन काउंसिल ऑफ़ इंडिया एक 7-सदस्यीय निकाय होगा, जिसका उद्देश्य देश में मीडिएशन प्रक्रिया को मानकीकृत और पेशेवर बनाना है। मंत्री ने बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ़ एक्सपेंडिचर और वाणिज्यिक निकायों के प्रतिनिधियों का नामांकन हो चुका है, जबकि चेयरपर्सन और अन्य विशेषज्ञ सदस्यों की नियुक्ति अगला प्रमुख कदम है।
यह प्रक्रिया पूरी होते ही काउंसिल पूरी तरह से कार्यशील हो सकेगी। मीडिएशन एक्ट, 2023 के तहत प्रस्तावित व्यवस्था का मकसद पारंपरिक और अनौपचारिक मीडिएशन पद्धतियों को एक मानकीकृत, विश्वसनीय और गुणवत्ता-आधारित प्रणाली में बदलना है। काउंसिल के सक्रिय होने के बाद देश में मीडिएशन सेवाओं के लिए एक स्पष्ट ढांचा तैयार होगा। इसके तहत मीडिएशन संस्थानों और मीडिएटर्स के लिए उच्च गुणवत्ता मानकों का निर्धारण किया जाएगा, ताकि विवाद समाधान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सके। सरकार ने ऑनलाइन डिस्प्यूट रेज़ोल्यूशन (ODR) को भी इस ढांचे का अहम हिस्सा बताया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग को देखते हुए ODR के लिए स्पष्ट नियामक दिशानिर्देश तैयार किए जाएंगे। इससे ई-कॉमर्स, डिजिटल लेन-देन और अन्य ऑनलाइन विवादों के समाधान में तेजी और सुविधा मिलेगी।
मंत्री ने कहा कि डिजिटल-फर्स्ट इंडिया के परिप्रेक्ष्य में ODR की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, कम्युनिटी मीडिएशन को भी नई व्यवस्था में विशेष महत्व दिया गया है। इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे विवादों का आपसी सहमति से समाधान संभव होगा, जिससे न्यायालयों पर दबाव कम होगा और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा मिलेगा। यह मॉडल ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध हो सकता है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस पहल को न्यायिक सुधारों की दिशा में अहम कदम बताते हुए कहा कि देश एक बड़े बदलाव के मुहाने पर है। उन्होंने कहा कि आसान, सुलभ और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना समय की मांग है, और मीडिएशन तंत्र इसमें निर्णायक भूमिका निभा सकता है।