धरसींवा में पुलिस मितान सम्मेलन आयोजित, ग्रामीण क्षेत्र में सामुदायिक पुलिसिंग को मिलेगा बढ़ावा

छग

Update: 2026-03-01 14:49 GMT
Raipur. रायपुर। रायपुर ग्रामीण पुलिस द्वारा सामुदायिक पुलिसिंग को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए थाना धरसींवा में “पुलिस मितान सम्मेलन” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक रायपुर (ग्रामीण) श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा के निर्देशानुसार संपन्न हुआ। सम्मेलन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) प्रशांत शुक्ला मुख्य रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने कार्यक्रम का नेतृत्व किया। सम्मेलन में थाना प्रभारी धरसींवा निरीक्षक राजेंद्र दीवान, पुलिस चौकी प्रभारी सिलतरा उप निरीक्षक राजेंद्र सिंह कंवर सहित अन्य पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पुलिस मितानों की भागीदारी रही, जिससे सम्मेलन का उद्देश्य स्पष्ट रूप से सफल होता नजर आया।

सम्मेलन के दौरान पुलिस मितानों को उनके दायित्वों और जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की सहायता करें, किसी भी संदिग्ध या आपराधिक गतिविधि की सूचना समय पर संबंधित थाने तक पहुंचाएं और आमजन तथा पुलिस के बीच एक सेतु की भूमिका निभाएं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि पुलिस मितान ग्रामीण समाज में पुलिस की आंख और कान के समान हैं। उनके सहयोग से अपराधों की रोकथाम, सामाजिक समरसता और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग की अवधारणा तभी सफल होगी जब जनता और पुलिस के बीच आपसी विश्वास और संवाद मजबूत होगा।

सम्मेलन के दौरान सड़क सुरक्षा को लेकर भी विशेष जोर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते सड़क हादसों को ध्यान में रखते हुए पुलिस मितानों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक रहने और दूसरों को भी प्रेरित करने की अपील की गई। इस अवसर पर सभी उपस्थित पुलिस मितानों को हेलमेट और टी-शर्ट वितरित किए गए, ताकि वे सड़क सुरक्षा अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा सकें। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पुलिस और जनता के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना तथा अपराध नियंत्रण में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाना रहा। सम्मेलन के अंत में सभी पुलिस मितानों ने पुलिस प्रशासन को हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया। ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह के आयोजनों से न केवल कानून-व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि पुलिस-जन संबंधों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
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