Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। जन समस्या समाधान के लिए आयोजित कलेक्टर जनदर्शन एक बार फिर प्रभावी साबित हुआ है। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे को जनदर्शन के दौरान मिले आवेदन पर तुरंत कार्रवाई करते हुए परिवहन विभाग को निर्देशित किया गया था कि यात्रियों की समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। अब उसका सकारात्मक परिणाम सामने आ गया है।
अब जिला मुख्यालय सारंगढ़ और आसपास क्षेत्रों के यात्रियों को रात्रिकालीन बसों की मनमानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। अनेक यात्री लंबे समय से शिकायत कर रहे थे कि रायपुर से जशपुर और रांची की ओर जाने वाली कई निजी बसें रात में सारंगढ़ शहर में न आकर सीधे दानसरा और हरदी बायपास में यात्रियों को उतार देती थीं। इससे यात्रियों, खासकर महिलाओं, छात्रों, बुजुर्गों और अन्य ग्रामीण यात्रियों को 5 से 10 किलोमीटर तक पैदल चलने जैसी कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता था।
कलेक्टर द्वारा दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बाद परिवहन विभाग ने इस संबंध में कड़ा पत्र जारी किया है। विभाग ने सभी बस संचालकों को निर्देशित किया है कि रात्रि में किसी भी यात्री को बायपास या सुनसान स्थानों पर न उतारा जाए। हर बस को सारंगढ़ बस स्टैंड तक आना अनिवार्य होगा। परिवहन विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई बस संचालक नियमों का पालन नहीं करता और यात्रियों को निर्धारित स्थान तक नहीं छोड़ता, तो उसके खिलाफ मोटरयान अधिनियम 1988 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसमें गाड़ी जब्ती, चालान, परमिट निलंबन जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
कलेक्टर डॉ. कन्नौजे ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बसों की नियमित निगरानी की जाए और रात्रिकालीन रूटों पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षा, सुविधा और विश्वसनीय परिवहन सेवा उपलब्ध कराना है। आवेदन देने वाले नागरिकों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से की जा रही शिकायतों पर पहली बार प्रभावी कदम उठाया गया है, जिससे अब रात्रिकालीन यात्रा सुरक्षित और सुविधाजनक होगी।
यह भी बताया गया कि कुछ बस संचालक समय बचाने और ईंधन की बचत के लिए जानबूझकर शहर में प्रवेश नहीं करते थे। लेकिन अब प्रशासनिक सख्ती के बाद ऐसी मनमानी पर रोक लगेगी। सारंगढ़ के निवासियों और यात्रियों ने इस निर्णय को एक जरूरी और समयानुकूल कदम बताया है। खासकर छात्र, नौकरीपेशा लोग और महिलाएँ प्रशासन के इस फैसले से राहत महसूस कर रहे हैं। कलेक्टर के निर्देश पर की गई यह कार्रवाई प्रशासन की जनहित के प्रति प्रतिबद्धता और जनदर्शन की उपयोगिता को एक बार फिर सिद्ध करती है।
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