Raipur. रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कृषि विभाग ने कीटनाशक उत्पादों के भंडारण और बिक्री में नियमों के उल्लंघन के मामले में सख्ती शुरू कर दी है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड स्थित मेसर्स बालाजी कृषि केंद्र में निरीक्षण के दौरान बिना प्रिंसिपल सर्टिफिकेट के अलग-अलग 34 कंपनियों के कीटनाशक उत्पाद भंडारित पाए गए। मामले में कृषि विभाग ने कृषि केंद्र संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही इन उत्पादों की आपूर्ति करने वाली 34 कंपनियों को भी नोटिस जारी किया गया है। सभी संबंधित कंपनियों से 2 सितंबर 2026 तक जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। विभाग की इस कार्रवाई से कीटनाशक कारोबार से जुड़े संस्थानों में हड़कंप मचा हुआ है।
संयुक्त निरीक्षण में सामने आया मामला
कृषि विभाग के अनुसार 20 अगस्त 2026 को राज्य एवं जिला स्तरीय संयुक्त निरीक्षण दल ने नवागढ़ स्थित मेसर्स बालाजी कृषि केंद्र का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान अलग-अलग कंपनियों के कीटनाशक उत्पाद वहां भंडारित मिले। निरीक्षण में यह भी पाया गया कि इन उत्पादों के संबंध में आवश्यक प्रिंसिपल सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं था। विभाग ने इसे कीटनाशी अधिनियम, 1968 और कीटनाशी नियम, 1971 के प्रावधानों का उल्लंघन माना है। इसके बाद संबंधित कृषि केंद्र के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
34 कंपनियों से भी मांगा जवाब
कृषि विभाग ने केवल विक्रेता संस्थान पर कार्रवाई नहीं की, बल्कि कीटनाशक उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को भी नोटिस जारी किया है। इनमें रायपुर सहित बिलासपुर, राजनांदगांव और तेलंगाना स्थित कंपनियां एवं उनसे जुड़े लॉजिस्टिक्स व ट्रेडिंग प्रतिष्ठान शामिल हैं। नोटिस पाने वाली कंपनियों में पीआई इंडस्ट्रीज लिमिटेड, श्री वासु लॉजिस्टिक्स लिमिटेड, आईपीएल ओवरसीज, कॉर्टेवा एग्रीसाइंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बीएएसएफ इंडिया लिमिटेड, गायत्री इंसेक्टिसाइड इंडिया, बायरा क्रॉप साइंस लिमिटेड, स्वाल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और कृष्णा केयर सहित अन्य संस्थाएं शामिल हैं।
इसके अलावा सिनजेंटा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, रालिस इंडिया लिमिटेड, आशा एंटरप्राइजेज, अतुल लिमिटेड, धर्माज क्रॉप गार्ड लिमिटेड, एमबीएफ इंडिया, सेफेक्स केमिकल्स इंडिया लिमिटेड, इंसेक्टिसाइड्स (इंडिया) लिमिटेड, नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड, अनु प्रोडक्ट्स लिमिटेड और जीएसपी क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड को भी जवाब देने के लिए कहा गया है।
कई राज्यों की कंपनियां जांच के दायरे में
जांच की कार्रवाई का दायरा छत्तीसगढ़ से बाहर तक पहुंचा है। विभाग द्वारा जारी नोटिस में तेलंगाना की श्रीकर बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल है। इसी तरह बिलासपुर की आलोक एग्रो केमिकल्स और राजनांदगांव की खंडेलवाल पेस्टिसाइड्स प्राइवेट लिमिटेड से भी जवाब मांगा गया है। विभाग के अनुसार अन्य संबंधित संस्थानों में ट्रॉपिकल एग्रो सिस्टम इंडिया, इंडो स्विस केमिकल्स, क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन, मेधनी एग्रोटेक, विलोवुड केमिकल्स, निचिनो इंडिया, केमिनोवा इंडिया, श्रीराम बायोकैम कॉर्पोरेशन, जय सी लाइफ साइंसेज, भगवती ओवरसीज, सरस्वती एग्रो केमिकल्स, जीवाग्रो लिमिटेड, एचपीएम केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स और आईपीएल बायोलॉजिकल लिमिटेड समेत कई कंपनियां शामिल हैं।
किसानों तक सुरक्षित उत्पाद पहुंचाने पर जोर
कृषि विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य कीटनाशक उत्पादों के भंडारण और आपूर्ति में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। प्रिंसिपल सर्टिफिकेट से संबंधित नियमों का पालन नहीं होने पर कृषि उत्पादों की वैधता और आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। ऐसे में विभाग ने विक्रेता के साथ-साथ उत्पाद उपलब्ध कराने वाली कंपनियों से भी जवाब मांगकर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की है। अब संबंधित पक्षों को 2 सितंबर तक अपना स्पष्टीकरण देना होगा। जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद विभाग आगे की कार्रवाई तय करेगा। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि कीटनाशक अधिनियम एवं नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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