Jagdalpur. जगदलपुर। बस्तर जिले में हड़ताल कर रहे स्कूल आश्रम छात्रावास शासकीय चतुर्थ वर्ग कर्मचारी कल्याण संघ के आंदोलन को सोमवार को एक नया और अनोखा मोड़ मिला। अपनी लंबित मांगों और नियमितिकरण की प्रक्रिया में हो रही देरी से आक्रोशित कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर हाथ में कटोरा लेकर प्रतीकात्मक भीख मांगी। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकार उन्हें 11 साल की सेवा के बाद भी नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं दे सकती, तो वे मजबूरी में जनता से ही मदद मांगने को विवश हैं।
2014 से कर रहे सेवा, अब भी अस्थायी
संघ की अध्यक्ष दीप्ति तिवारी ने बताया कि वर्ष 2014 में भर्ती होने के बाद से अब तक वे निरंतर सेवा दे रहे हैं। बावजूद इसके उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि बीते 11 सालों से लगातार काम करने के बाद भी भविष्य सुरक्षित नहीं है, और परिवार का भरण-पोषण करना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है।
दो महीने से नहीं मिला वेतन
कर्मचारियों ने बताया कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पिछले दो महीने से उन्हें वेतन भी नहीं मिला। बिना वेतन के परिवार चलाना असंभव हो गया है। कई कर्मचारियों को बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च पूरे करने के लिए कर्ज लेना पड़ा है। यही वजह है कि उन्होंने कटोरा लेकर अपनी बदहाली का संदेश सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का निर्णय लिया।
रायपुर में भी जारी आंदोलन
संघ की अध्यक्ष दीप्ति तिवारी ने कहा कि बस्तर ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के चतुर्थ वर्ग कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर राजधानी रायपुर में भी लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। बावजूद इसके, सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की उपेक्षा से उनमें गहरी नाराजगी है और आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी सबसे बड़ी मांग नियमितिकरण और बकाया वेतन का तत्काल भुगतान है। साथ ही, उन्होंने स्थायी वेतनमान और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को टाल रही है जबकि वे लगातार कठिन परिस्थितियों में भी स्कूल और छात्रावासों की व्यवस्था संभाल रहे हैं।
हड़ताल से प्रभावित हो रही व्यवस्थाएं
लगातार हड़ताल से आश्रम छात्रावासों की दिनचर्या पर असर पड़ने लगा है। छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं और कई स्थानों पर कर्मचारियों की कमी से दिक्कतें बढ़ गई हैं। स्थानीय प्रशासन भी मान रहा है कि यदि हड़ताल लंबी खिंचती है तो शिक्षा और छात्रावास की गतिविधियों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।