Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में शुक्रवार को छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़फोड़ के विरोध में बुलाए गए जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के बंद के दौरान तनाव की स्थिति बन गई। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए हैं और कई संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया है। जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के पदाधिकारी शुक्रवार सुबह बंद के समर्थन में शहर में रैली और प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोक लिया। पुलिस ने चंद्राकर हॉस्टल (महादेव घाट रोड) परिसर को अस्थायी निगरानी केंद्र में तब्दील कर दिया है, जहां क्रांति सेना के कई कार्यकर्ताओं को रोका गया और बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगाया गया। हॉस्टल के मुख्य द्वार पर पुलिस ने ताला लगाकर प्रवेश पूरी तरह से बंद कर दिया है। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।
बंद के दौरान शहर में सामान्य जनजीवन
बंद के आह्वान के बावजूद रायपुर में शहर के प्रमुख बाजार, व्यापारिक संस्थान और स्कूल सामान्य रूप से खुले रहे। छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज और प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे इस बंद को समर्थन नहीं देंगे। सुबह से ही राजधानी के पंडरी, तेलीबांधा, जयस्तंभ चौक, फाफाडीह, सदर बाजार, माना और राजेन्द्र नगर जैसे इलाकों में ट्रैफिक सामान्य रहा और लोग अपने दैनिक कार्यों में लगे रहे। कुछ जगहों पर जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के समर्थक बंद के समर्थन में नारेबाजी करते दिखाई दिए, लेकिन पुलिस ने तुरंत उन्हें शांत कराया।
प्रशासन ने अपनाया एहतियाती रुख
पुलिस प्रशासन ने पहले से ही बंद के मद्देनज़र सख्त सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी। रायपुर शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बाजारों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। साथ ही, रायपुर पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट मोड पर रखा गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शहर में 200 से अधिक पुलिस जवान और अधिकारी सुरक्षा ड्यूटी पर लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी को भी कानून व्यवस्था भंग करने या सड़क पर उतरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। रायपुर एसएसपी ने कहा- “हाउस अरेस्ट की कार्रवाई एक एहतियाती कदम है। हमारा उद्देश्य किसी को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि शहर में शांति बनाए रखना है। रायपुर की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कहीं से भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।”
बंद का कारण — छत्तीसगढ़ महतारी मूर्ति तोड़फोड़
दरअसल, कुछ दिनों पहले रायपुर में छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति के साथ तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी। इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश और नाराजगी फैला दी थी। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने इसे “छत्तीसगढ़ की अस्मिता पर हमला” बताते हुए राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया था। पार्टी ने मांग की है कि सरकार मूर्ति तोड़ने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करे और साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर छत्तीसगढ़ महतारी की नई प्रतिमाएं स्थापित की जाएं। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा- “छत्तीसगढ़ महतारी हमारे सम्मान और अस्तित्व की प्रतीक हैं। उनकी मूर्ति तोड़ना छत्तीसगढ़ की आत्मा को ठेस पहुंचाने जैसा है। जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, हमारा विरोध जारी रहेगा।”
पुलिस और प्रशासन की सतर्कता
संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी रायपुर और उसके आसपास के इलाकों में धारा 144 प्रभावी रखी गई है। किसी भी तरह के जुलूस, रैली या धरने की अनुमति नहीं दी गई है। शहर के संवेदनशील इलाकों में ड्रोन सर्विलांस और CCTV मॉनिटरिंग के जरिए हालात पर नजर रखी जा रही है। पुलिस ने कहा कि किसी भी संगठन को सड़क पर उतरने या भीड़ इकट्ठा करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर भी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और अफवाह फैलाने से बचें।
राजधानी में माहौल शांत लेकिन सतर्क
रायपुर के कई हिस्सों में शुक्रवार सुबह हल्की चहल-पहल के बीच बाजार खुले रहे, हालांकि कई दुकानदारों ने सुबह के पहले कुछ घंटों के लिए दुकानें बंद रखीं ताकि हालात का जायजा लिया जा सके। बाद में जब माहौल सामान्य दिखा तो उन्होंने कारोबार शुरू कर दिया। शहर के बस अड्डे और रेलवे स्टेशन पर भी यातायात सामान्य रहा। यात्रियों को किसी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि, पुलिस ने बस स्टैंड और स्टेशन के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती की थी। राजधानी में हुई इस घटना और उसके बाद के विरोध से सरकार पर भी दबाव बढ़ा है कि वह छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़ने वालों को जल्द गिरफ्तार करे। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इस मामले की हाई-लेवल जांच कराई जाए और दोषियों को उदाहरण स्वरूप सजा दी जाए।