पुलिस की छापामार कार्रवाई होटल में दस्तक देते ही पार्टी माफिया यूजिक और डांस बंद करते हैं
अपने शौक को पूरा करने हर रोज होटलों और क्लबों में सजाते है नंगी महफिल
होटल, क्लब बार और पार्टी के नाम पर नंगा नाच कराने वाले माफियाओं के लिए कोई कानून नहीं
आबकारी विभाग से मिले लाइसेंस को इवेंट मैनेजरों ने नंगा नाच कराने का प्रमाणीकरण मान लिया
छुटभैय्या नेता और अधिकारी के बच्चे पार्टी में एंट्री के लिए करते हैं पार्टी माफियाओं की दलाली
एक्साइज विभाग के आरोपी अधिकारी की पार्टी माफियाओं से बड़ी सांठगांठ जिसके कारण शहर नंगी और गंदी पार्टियों के गर्त में चला गया
रायपुर (जसेरि)। राजधानी रायपुर के होटलों, नवा रायपुर के आईबी क्लब और लाइसेंसी बार वाले नंगा नाच का तमाशा दिखाकर चांदी काट रहे है। ये होटल, क्लब बार और पार्टी के नाम पर नंगा नाच कराने वालों के लिए कोई कानून नहीं है । ये नेता टाइप होटल और क्लब-बार के मालिकों की पहुंच बड़े रसूखदार मंत्री नेता तक है। जो पुलिस को धौंस दिखाकर देर रात तक नंगी पार्टी आयोजित करते हैं। मजेदार बात यह है कि उनके पास आबकारी विभाग से मिले शराब का लायसेंस जो मासिक, तिमाही, छैमाही और वार्षिक होता है जिसे नेताओं की पहुंच की आड़ में वो पुलिस सहित दूसरे विभागों की आंख में धुल झोंकते हैं और तमाम तरह के टैक्स की चोरी करते हैं।
आबकारी लाइसेंस बन गया मनमानी का फरमान: जबकि उन्हें बार या क्लब संचालित करने के लिए संबंधित थाने के अलावा उस क्षेत्र के पार्षद,थाना और नगर निगम से भी एनओसी लेने की दरकार होती है तब जाकर एक निश्चित समय अवधि तक ही बार का लाइसेंस मिलता है जिसके आड़ में पार्टी चलाने का खेल चलता है।बार मालिकों और क्लबों को मनमर्जी का लाइसेंस समझ कर मनमानी करते है। नवा रायपुर और राजधानी रायपुर में अपनी मनमर्जी चलाते है। वो वही करते हैं जिससे उनको लाखों का फायदा हो। होटलों, बार, क्लबों वाले नियम कायदे को धता बताते नज़र आते हैं।
पुलिस का यूं ही इस तरह चला जाना: पुलिस भी आबकारी विभाग के लाइसेंस को देखकर बिना कार्रवाई किये वापस चले जाते हैं। पार्टी आयोजनकर्ता तरह-तरह के विज्ञापन देकर युवाओ को लुभाते हैं जिसमें युवतियों की एंट्री फ्री और युवको से भारी भरकम एंट्री फीस भी लेते हैं जो लगभग 30 हजार से एक लाख तक होती है इस तरह के आयोजन में देश भर के कॉलगर्ल रायपुर में जमा होते हैं उनके लिए होटल भी बुक रहती है इसी के लिए युवको से भारी भरकम फीस लेते हैं क्योकि उनको मनचाही लड़की भी होटल वाले उपलब्ध कराते हैं। इसी कारण से पुरे देश से युवाओं की भीड़ शुक्रवार शनिवार और इतवार को राजधानी रायपुर में देखने को मिलती है। बड़े बड़े होटलों क्लबों और बार में पैर रखने की जगह नहीं होती। मजे की बात एंट्री फीस में मनोरंजन कर के अलावा जीएसटी भी लगना चाहिए लेकिन सर बार लायसेंस लेकर सभी टैक्स की चोरी करते हैं और शासन को राजस्व भी नहीं मिलती इस प्रकार ये टैक्स तो चोरी करते ही हैं ऊपर से मनमाना फीस वसूल कर देर रात तक पार्टी आयोजित करते हैं।
आइये न्यूड पार्टी का हिस्सा बनकर जीवन का लुत्फ उठाइये : पिछले दिनों छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सितंबर 2025 में सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम) के ज़रिए एक न्यूड पार्टी आयोजित करने की कोशिश का मामला सामने आया था। इस मामले पर पुलिस ने तुरंत कड़ी कार्रवाई की थी। पार्टी में शामिल होने के लिए सोशल मीडिया पर विज्ञापन, इंस्टाग्राम पर एक अकाउंट से पोस्टर शेयर कर युवक-युवतियों को इस अश्लील इवेंट के लिए इनवाइट किया गया था।हालांकि सामाजिक संगठनों के कड़े विरोध के बाद पुलिस ने की तुरंत कार्रवाई पुलिस हरकत में आई और वीआईपी रोड (भाटागांव) के एक फार्म हाउस में होने वाली इस कथित पार्टी को रुकवा दिया था। और इस मामले में अश्लीलता फैलाने और कानून का उल्लंघन करने के आरोप में पुलिस ने 7 आरोपियों को गिर तार किया था। अब सवाल उठता है कि इस तरह की पार्टी आयोजित करने वाले कहाँ के होते हैं और इस तरह की पार्टियों में कौन लोग पार्टिशिपेट करते हैं क्या उनके माँ बाप या नाते रिश्तेदार यहाँ नहीं रहते या आधुनिकता की दौड़ में वे भी शामिल रहते हैं। या फिर सर पैसे कमाने या आधुनिकता के नंगे दौड़ में अंधे हो चुके हैं। पुलिस की लगातार कार्रवाई और स ती के बावजूद समाज के तथाकथित सफेदपोश रसूखदार लोग प्रशासन से बेखौफ शहर के कुछ बार और ढाबे नशाखोरों को अवैध शराब परोसना बंद नहीं कर रहे हैं।
पुलिस का एक्शन महज खानापूर्ति : राजधानी मे कुछ बार और ढाबे ऐसे है जिन्हे मानों पुलिस और आबकारी विभाग से विशेष छूट मिली हुई हों। जिसमे वीआईपी रोड, माना, रायपुरा, टाटीबंद, तेलीबांधा, पचपेड़ी नाका,टिकरापारा, सिविल लाइन, जय स्तंभ चौक के आसपास के नामचीन होटल, देवेंद्र नगर थाना क्षेत्र के कुछ बार और नवा रायपुर मंदिरहसोद थाना इलाके के ढाबे, तेलीबांधा थाना क्षेत्र के बड़े और छोटे होटल अव्वल नंबर पर है। बार और होटलों मे तय नियम और समय के बाद भी खुलेआम देर रात से सुबह तक शराब बेची जाती है, बार से कुछ ही दूरी पर थाने के अधिकारियों के कानों तक इसकी भनक तक नहीं लगती है, और न ही इन का यह अवैध धंधा पुलिस को दिखाई देता है जो कि अपने आप में स बंधित क्षेत्र के थाने की भूमिका पर सवाल खड़ा करता है। इतना ही नहीं वहा के स्थानीय लोग भी बार और होटल के संचालकों के खिलाफ कई दफा शिकायत कर चुके इसके बाद पुलिस द्वारा एक्शन तो लिया जाता रहा लेकिन वो महज रस्मअदायगी और खानापूर्ति ही साबित होता है।
गार्ड की भूमिका बार क्लब मालिक जैसी : इस मामले की शिकायत मिलते ही हमारी टीम जब पड़ताल करने मौक़े पर पहुंची तो वहा का नज़ारा ही कुछ और था। बार का गॉर्ड भी मालिक की तरह बकायदा कार में आए ग्राहकों को रात 1 बजे के करीब ठंडी बियर परोसता नजर आता है। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया मे बड़ी तेजी से वायरल हों हुआ था। यही हाल रायपुर के आउटर के क्षेत्रो का है जहाँ का कोई माई बाप ही नहीं है , खुले आम नंगी पार्टिया होटलो में आयोजित होती है लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर पाती। पुलिस वाले जब छापा मारने जाते है तो उन्हें भी बैठाकर आवभगत कर उनके रातभर की गश्त की थकान को उतारने की टानिक देकर चलता कर देते है। थोड़ा डांस का भी इंजायमेंट करवा देते है। बस फिर क्या वो बिना कार्रवाई किए उल्टे पांव लौट जाते है।
सिर्फ थाने में अनुमति के लिए आवेदन देकर किया पार्टी, पुलिस बेखबर
राजधानी रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र स्थित EDO क्लब में शनिवार रात आयोजित पार्टी के दौरान जमकर हंगामा और मारपीट होने का मामला सामने आया है। नहीं तो यह मामला भी दब गया होता । क्या आबकारी से मिला लाइसेंस हुड़दंग करने की खुली छूट तो नहीं है। मामले में पुलिस ने चार युवकों को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि आयोजक ने पार्टी के लिए तेलीबांधा थाने में आवेदन दिया था। घटना के बाद आयोजन की अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित समय के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, कोटा रायपुर निवासी लक्की बजाज ने तेलीबांधा थाने में एक प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें 26 सितंबर को श्वष्ठह्र वीआईपी रोड में शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक पार्टी आयोजित करने की जानकारी दी गई थी। आवेदन में कार्यक्रम के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने, सभी नियमों का पालन करने और शांति एवं सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई थी। इसके बावजूद पार्टी के दौरान विवाद की स्थिति बन गई और युवकों के बीच मारपीट होने की बात सामने आई। घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार युवकों को हिरासत में लिया है। उनसे घटना के संबंध में पूछताछ की जा रही है। पूरे घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि इस तरह के आयोजनों के लिए सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति ली गई थी या केवल थाने में आवेदन देकर कार्यक्रम आयोजित किया गया। बड़े आयोजनों के लिए लागू नियमों और विभिन्न विभागों से आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं, इसकी जांच जरूरी है। पुलिस को दिए गए आवेदन को किस रूप में स्वीकार किया गया और आयोजक के पास अन्य आवश्यक अनुमतियां थीं या नहीं, यह भी जांच का विषय है। आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बड़ी सं या में लोगों के एकत्र होने वाले कार्यक्रम में किसी तरह का विवाद या गंभीर घटना होने पर जि मेदारी किसकी होगी, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। पार्टी के दौरान मारपीट की घटना सामने आने के बाद आयोजक की ओर से किए गए सुरक्षा और शांति व्यवस्था के दावों पर भी सवाल खड़े हुए हैं। अगर लड़ाई नहीं होती तो पुलिस को पता भी नहीं चलता और रातभर पार्टी चलती रहती। राजधानी में क्लब और बार में आयोजित होने वाली पार्टियों के प्रचार-प्रसार को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। आयोजकों द्वारा सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से युवाओं को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग ऑफर दिए जाते हैं। कई आयोजनों में महिलाओं के लिए मु त प्रवेश और पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रवेश शुल्क रखे जाने की बातें सामने आती रही हैं।
, ऐसे आयोजनों में अत्यधिक प्रवेश शुल्क वसूलने, बाहर से महिलाओं को बुलाने या होटलों द्वारा किसी तरह की अवैध सुविधा उपलब्ध कराने जैसे गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। बिना जांच और प्रमाण के ऐसे आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। यदि इस संबंध में कोई शिकायत या प्रमाण सामने आता है तो संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इसी तरह पार्टी और क्लबों से मिलने वाले प्रवेश शुल्क पर लागू टैक्स और अन्य राजस्व नियमों के पालन का विषय भी संबंधित विभागों की जांच के दायरे में आता है। आयोजक द्वारा टिकट या प्रवेश शुल्क से होने वाली आय का रिकॉर्ड रखा गया या नहीं, लागू त्रस्ञ्ज और अन्य करों का भुगतान किया जा रहा है या नहीं तथा बार लाइसेंस की शर्तों का पालन हुआ या नहीं, इसकी पुष्टि संबंधित विभागों के रिकॉर्ड से ही हो सकती है।
श्वष्ठह्र क्लब की घटना के बाद यह भी सवाल है कि पार्टी निर्धारित समय सीमा के भीतर समाप्त हुई या इसके बाद भी गतिविधियां जारी रहीं। साथ ही शराब परोसने से जुड़े लाइसेंस और उसकी निर्धारित शर्तों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच भी आवश्यक है। फिलहाल पुलिस ने मारपीट के मामले में चार युवकों को हिरासत में लिया है। मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ के बाद घटना की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट होंगी। वहीं आयोजन के लिए आवश्यक अनुमति, निर्धारित समय, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य नियमों के पालन की जांच होने पर यह सामने आएगा कि कार्यक्रम के दौरान किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं।
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