साइबर ठगी का बड़ा मामला, घरेलू बातचीत के बहाने 45 हजार की ठगी

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Update: 2026-04-18 13:29 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है, जिसमें भारतीय नगर निवासी रितेश वर्मा पिता राम अभिलाश श्रीवास्तव (उम्र 34 वर्ष) और उनकी पत्नी रश्मि श्रीवास्तव ने लिखित शिकायत दर्ज कराई है। आवेदन के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 16 अप्रैल 2026 की सुबह लगभग 11 बजे आवेदक के मोबाइल नंबर पर एक अज्ञात कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने पहले घरेलू बातचीत कर विश्वास बनाने की कोशिश की और बाद में कहा कि उसने उनके खाते में 10 रुपये ट्रांसफर किए हैं और जल्द ही 45,000 रुपये भेजे हैं। आरोपी ने पीड़ित को UPI के माध्यम से एक मोबाइल नंबर पर पैसे भेजने के लिए कहा।

आवेदक के अनुसार, आरोपी के कहने पर उन्होंने अलग-अलग ट्रांजेक्शन आईडी के माध्यम से 15,000 रुपये, 10,000 रुपये और 25,000 रुपये सहित कुल 50,000 रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में साइबर सेल की जांच में सामने आया कि यह पूरी राशि मध्यप्रदेश के ग्वालियर स्थित यूको बैंक एटीएम से निकाली गई थी। जांच रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि इस मामले में चार अलग-अलग मोबाइल नंबरों का उपयोग किया गया, जो अभी भी सक्रिय हैं और उनका इस्तेमाल जारी है। साइबर सेल द्वारा इन नंबरों को संदिग्ध बताया गया है और तकनीकी जांच जारी है। पीड़ित रितेश वर्मा ने बताया कि कॉल करने वाले व्यक्ति ने बेहद शातिर तरीके से बातचीत कर उन्हें विश्वास में लिया और धीरे-धीरे बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली।

बाद में जब बैंक स्टेटमेंट और साइबर रिपोर्ट देखी गई, तो ठगी का पूरा मामला सामने आया। साइबर सेल द्वारा दी गई रिपोर्ट को पुलिस ने केस डायरी में शामिल कर लिया है और तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब मोबाइल नंबरों की लोकेशन, बैंक ट्रांजेक्शन और एटीएम निकासी के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। थाना सिविल लाइन पुलिस ने बताया कि इस प्रकार की साइबर ठगी लगातार बढ़ रही है, जिसमें लोगों को पहले विश्वास में लेकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल पर बैंकिंग जानकारी या पैसे ट्रांसफर न करें। फिलहाल मामला विवेचना में है और साइबर टीम आरोपियों तक पहुंचने के लिए डिजिटल ट्रेल खंगाल रही है। जल्द ही आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
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