Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में एक बेहद शर्मनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। अस्पताल की सुरक्षा में तैनात प्राइवेट बाउंसरों द्वारा अपने कर्तव्यों की सीमाएं लांघते हुए एक पत्रकार से धक्का-मुक्की और अभद्रता की गई। यह पूरी घटना अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिससे बाउंसरों की गुंडागर्दी के स्पष्ट सबूत सामने आ चुके हैं। यह घटना उस समय हुई जब उरला इलाके में हुई चाकूबाजी की घटना की जानकारी लेने और घायलों की स्थिति जानने के लिए एक बड़े टीवी चॅनेल के पत्रकार अस्पताल पहुंचे थे। पत्रकार अपने पेशेवर दायित्वों के तहत संबंधित वार्ड में जा रहा था, तभी वहां मौजूद एक प्राइवेट बाउंसर ने उसे रोका। जब पत्रकार ने अपनी पहचान दी और खबर कवरेज की बात कही, तब बाउंसर ने न केवल उसे रोकने की कोशिश की, बल्कि अपशब्द कहे और जबरन धक्का देकर पीछे हटा दिया।
सुरक्षा के नाम पर मनमानी
अस्पताल में प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी के माध्यम से तैनात किए गए बाउंसरों की भूमिका पहले भी कई बार सवालों के घेरे में रही है, लेकिन इस बार तो उन्होंने सारी हदें पार कर दीं। एक पत्रकार, जो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, के साथ ऐसी बर्बरता प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है। अस्पताल प्रशासन भले ही मरीजों और परिजनों की सुरक्षा की दुहाई देता हो, लेकिन अगर सुरक्षा कर्मचारी ही गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाएं, तो आम नागरिकों का क्या होगा?
घटना CCTV में कैद, फुटेज हुआ वायरल
इस घटना का पूरा घटनाक्रम अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गया है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि बाउंसर पत्रकार से बहस कर रहा है और अचानक उसे धक्का देकर पीछे करता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है और पत्रकार संगठनों, आम नागरिकों और राजनैतिक दलों द्वारा तीखी प्रतिक्रिया दी जा रही है।
पूर्व में भी रहे हैं विवाद
यह पहली बार नहीं है जब सरकारी अस्पताल में बाउंसरों के व्यवहार को लेकर विवाद हुआ है। पहले भी मरीजों के परिजनों और यहां तक कि कुछ चिकित्सकों से भी बहस और हाथापाई की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लेकिन प्रशासन द्वारा इन घटनाओं को अक्सर नजरअंदाज किया गया, जिसका नतीजा आज पत्रकार के साथ हुई अभद्रता के रूप में सामने आया है। रायपुर के सबसे बड़े अस्पताल में पत्रकार से धक्का-मुक्की और बदसलूकी की यह घटना न केवल एक व्यक्ति पर हमला है, बल्कि लोकतंत्र और स्वतंत्र प्रेस के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार है। सवाल यह भी है कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर तैनात बाउंसरों को किस हद तक अधिकार दिए गए हैं, और क्या उनका प्रशिक्षण व आचरण जांच के लायक नहीं है? अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन और सरकार इस गंभीर मामले में कोई ठोस कार्रवाई करते हैं, या फिर यह भी अन्य घटनाओं की तरह समय के साथ भुला दिया जाएगा। फिलहाल पत्रकार संगठनों ने मामले को लेकर मोर्चा खोल दिया है और आने वाले दिनों में इस घटना का राजनीतिक और सामाजिक असर भी देखने को मिल सकता है।