IG डॉ. संजीव शुक्ला की अपराध समीक्षा बैठक, लंबित मामलों की साप्ताहिक मॉनिटरिंग अनिवार्य
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Bilaspur. बिलासपुर। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) डॉ. संजीव शुक्ला ने मंगलवार को रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की। यह बैठक रेंज स्तरीय अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग की गुणवत्ता को लेकर की गई, जिसमें वर्ष 2023 से लेकर जून 2025 तक के अपराध आंकड़ों की बारीकी से समीक्षा की गई। बैठक का फोकस गंभीर अपराधों की विवेचना, महिला-बाल सुरक्षा, मादक पदार्थ नियंत्रण, संपत्ति से जुड़े अपराधों तथा पुलिस अनुशासन पर रहा।
बैठक में बिलासपुर, मुंगेली, कोरबा, रायगढ़, सक्ती, जांजगीर-चांपा और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिलों के पुलिस अधीक्षक शामिल हुए। रेंज कार्यालय से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती मधुलिका सिंह सहित अन्य अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे। IG डॉ. शुक्ला ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि गंभीर अपराधों — विशेषकर हत्या, बलात्कार, अपहरण और महिला व बाल अपराधों की विवेचना में तेजी लाई जाए। उन्होंने सभी जिलों के एसपी को निर्देशित किया कि लंबित मामलों की साप्ताहिक समीक्षा अनिवार्य रूप से की जाए और थाना प्रभारियों तथा विवेचकों से प्रतिदिन प्रगति रिपोर्ट ली जाए।
महिला और बाल अपराध 'शीर्ष प्राथमिकता'
महिला और बाल अपराधों को IG ने ‘शीर्ष प्राथमिकता’ श्रेणी में रखा। उन्होंने कहा कि इन मामलों में त्वरित संज्ञान लेकर समयबद्ध विवेचना और चालान पेश किए जाएं। पीड़िता की सुरक्षा और अधिकारों का संरक्षण सर्वोपरि है। किसी भी तरह की लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
NDPS एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई और सीमावर्ती चेकिंग अभियान
मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम कसने हेतु NDPS एक्ट के तहत अब तक हुई कार्रवाई की समीक्षा की गई। IG ने निर्देश दिए कि ड्रग्स और नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष चेकिंग अभियान चलाए जाएं। इसके लिए मुखबिर तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि नशे का कारोबार सिर्फ कानून व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समाज की नींव को कमजोर करता है।
संपत्ति संबंधी अपराधों पर नियंत्रण के उपाय
संपत्ति अपराधों जैसे चोरी, लूट, डकैती आदि पर प्रभावी नियंत्रण के लिए नियमित गश्त, संदिग्ध व्यक्तियों की निगरानी और आदतन अपराधियों पर कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए। IG ने विशेष रूप से जुआ, सट्टा, अवैध शराब तथा नशे के विरुद्ध सतत अभियान चलाने को कहा।
अनुशासन पर सख्त रुख
डॉ. शुक्ला ने कहा कि पुलिस बल की कार्यप्रणाली की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता का आधार अनुशासन है। उन्होंने चेतावनी दी कि अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी भी पुलिसकर्मी की गलती पर तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि वे अपने अधीनस्थों को लगातार मार्गदर्शन दें और यह सुनिश्चित करें कि शासन और विभागीय निर्देश थानों तक समय पर पहुंचें।
विवेचना की दक्षता पर ज़ोर
IG ने लंबित विवेचनाओं को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों का समय पर निराकरण पुलिसिंग की साख के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले लंबे समय तक पेंडिंग रहना न केवल पीड़ित को न्याय से वंचित करता है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
राजपत्रित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय
बैठक में उन्होंने राजपत्रित अधिकारियों को क्षेत्र में नियमित निरीक्षण, विवेचकों को समय-समय पर मार्गदर्शन और कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को केवल बैठक में उपस्थिति से नहीं, बल्कि क्षेत्र में सक्रियता और जनसंपर्क से अपनी भूमिका को सिद्ध करना होगा।
तकनीकी और डिजिटल पुलिसिंग पर भी चर्चा
बैठक में डिजिटल ट्रैकिंग, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, अपराधियों की डिजिटल प्रोफाइलिंग और स्मार्ट पुलिसिंग जैसे आधुनिक तरीकों को भी अपनाने की बात कही गई। IG ने सुझाव दिया कि तकनीक का बेहतर उपयोग कर अपराधों पर नियंत्रण संभव है, इसलिए हर जिले को टेक्नोलॉजी फ्रेंडली पुलिसिंग की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
सार्वजनिक विश्वास और पुलिसिंग की पारदर्शिता
अंत में IG डॉ. शुक्ला ने कहा कि पुलिस की सबसे बड़ी पूंजी जनता का विश्वास है। अगर पुलिस निष्पक्ष, संवेदनशील और जवाबदेह रहती है, तो समाज में अपराध स्वतः कम होता है। उन्होंने थानों में आने वाले हर नागरिक के साथ मानवीय व्यवहार और संवेदनशीलता बरतने का निर्देश दिया।