Bilaspur. बिलासपुर। जिले में युक्तियुक्तकरण और सहायक शिक्षकों को हेड मास्टर के पद पर दी गई पदोन्नति के बाद मनचाही पोस्टिंग को लेकर सामने आई शिकायतों की जांच में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने की बात सामने आई है। तीन सदस्यीय जांच समिति ने दस्तावेजों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट स्कूल शिक्षा विभाग के लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को सौंप दी है। रिपोर्ट पहुंचने के बाद नियमों को दरकिनार कर बैकडोर तरीके से या संशोधित आदेशों के जरिए मनचाहे स्कूलों में पोस्टिंग पाने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि तत्कालीन डीईओ तांडे के कार्यकाल में युक्तियुक्तकरण और पदोन्नति से जुड़े मामलों में कई स्तरों पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। अब जांच रिपोर्ट डीपीआई तक पहुंचने के बाद विभागीय स्तर पर पूरे मामले को दुरुस्त करने की कवायद शुरू होने की चर्चा है। ऐसे में संबंधित शिक्षकों की पोस्टिंग और पूर्व में जारी किए गए संशोधित आदेशों की दोबारा समीक्षा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। तबादला या पोस्टिंग आदेश निरस्त कर नए सिरे से आदेश जारी किए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
हाईकोर्ट पहुंचा था मामला
पदोन्नति प्रक्रिया से असंतुष्ट शिक्षक हलधर साहू, रमेश साहू, शिप्रा बघेल, सूरज सोनी और ज्ञानचंद पांडेय ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित शिक्षकों को नए सिरे से अभ्यावेदन प्रस्तुत करने और स्कूल शिक्षा विभाग को उस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद याचिकाकर्ता शिक्षकों ने लोक शिक्षण संचालनालय के समक्ष अपना अभ्यावेदन पेश किया। इसके बाद डीपीआई ने 4 सितंबर 2025 को आदेश जारी करते हुए इन सभी शिक्षकों के अभ्यावेदन को अमान्य कर दिया था। आरोप है कि इसके बावजूद बाद में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से बिना काउंसलिंग के संबंधित शिक्षकों को उनकी पसंद के स्थान पर पोस्टिंग दे दी गई। इसी प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति ने संबंधित दस्तावेज, नोटशीट और आदेशों की जांच की।
नोटशीट पर नहीं मिले सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर
जांच समिति द्वारा दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान संबंधित नोटशीट पर सक्षम समिति अथवा अन्य शाखा प्रभारी के हस्ताक्षर नहीं मिलने की बात सामने आई है। शिकायतों में युक्तियुक्तकरण का गलत तरीके से लाभ पाने वाली शिक्षिकाओं संतोषी शर्मा, वंदना लहरे और जानकी चेलके के नाम शामिल हैं। इसके अलावा पदोन्नति अथवा संशोधित आदेश का लाभ पाने वाले शिक्षकों में दिनेश कुमार तंबोली, रमेश सिंह उईके, हरिपाल सिंह पैंकरा, दिलेश कुमार धृतलहरे, पुरुषोत्तम सिंह निखर, हेमलता पटेल, ईश्वरी ध्रुव, आस्था गौरहा, फुलेश सिंह पोर्ते और टंकेश्वर कुमार जगत के नाम शिकायत में बताए गए हैं।
स्थापना शाखा के प्रभारी लिपिक की भूमिका पर सवाल
मामले को लेकर लगातार शिकायत करने वाले कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्थापना शाखा के प्रभारी लिपिक सुनील यादव को जानबूझकर बचाया जा रहा है। गौरहा का कहना है कि उन्होंने जांच समिति के समक्ष दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए थे। उनके अनुसार, इन्हीं दस्तावेजों और मूल रिकॉर्ड से तत्कालीन डीईओ की भूमिका स्पष्ट होती है। उन्होंने दावा किया कि मूल नस्तियों, रिकॉर्ड और संशोधित आदेशों पर प्रभारी लिपिक के हस्ताक्षर और उनकी भूमिका भी दर्ज है। गौरहा ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वही दस्तावेज और रिकॉर्ड जांच का आधार हैं, तो निर्णय लेने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी तय होने के साथ नोटशीट को आगे बढ़ाने वाले संबंधित कर्मचारी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी पर कार्रवाई की बात सामने आने के बावजूद संबंधित बाबू को क्लीनचिट देने की कोशिश की जा रही है।
पुराने मामले का भी दिया हवाला
शिकायतकर्ता ने करीब तीन वर्ष पुराने तत्कालीन बीईओ एमएल पटेल से जुड़े मामले का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भी जांच की आंच अधिकारियों तक पहुंची थी, जबकि प्रतिकूल रिपोर्ट के बावजूद संबंधित बाबू कार्रवाई से बच गया था। उनका आरोप है कि मौजूदा मामले में भी इसी तरह की स्थिति दोहराई जा रही है। फिलहाल तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट डीपीआई तक पहुंच चुकी है। अब विभागीय स्तर पर रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाना है। संबंधित पोस्टिंग और संशोधित आदेशों की समीक्षा के साथ नए सिरे से आदेश जारी होने की संभावना पर भी नजर बनी हुई है।
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