Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के प्रभारी पद को लेकर चल रहे विवाद पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रभारी नियुक्ति को लेकर दायर याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि केवल वरिष्ठता के आधार पर कोई अधिकारी उच्च पद का प्रभार पाने का दावा नहीं कर सकता। मामला गरियाबंद जिले में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की नियुक्ति से जुड़ा था। यहां जूनियर अधिकारी राजेश चंद्राकर को प्रभारी DEO बनाए जाने के खिलाफ विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) किशुन लाल मातवाले ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता किशुन लाल मातवाले का कहना था कि वह वर्ष 1995 से शिक्षा विभाग में सेवा दे रहे हैं और वरिष्ठता के आधार पर उनका दावा अधिक मजबूत था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनसे जूनियर अधिकारी को प्रभारी DEO नियुक्त कर उन्हें नजरअंदाज किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था और प्रभारी नियुक्ति की प्रकृति को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि किसी अधिकारी को किसी पद का प्रभारी बनाया जाना स्थायी पदोन्नति नहीं होती, बल्कि यह एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था होती है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकार को यह अधिकार है कि वह किसी पद के लिए अधिकारी की कार्यक्षमता, प्रशासनिक अनुभव और उपयुक्तता को ध्यान में रखते हुए प्रभारी नियुक्ति का निर्णय ले सकती है। केवल वरिष्ठ होने के आधार पर कोई अधिकारी प्रभारी पद पर नियुक्ति का अधिकार नहीं मांग सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासनिक निर्णयों में न्यायालय तभी हस्तक्षेप करता है, जब किसी नियम या कानून का स्पष्ट उल्लंघन हुआ हो। यदि सरकार ने नियमों के दायरे में रहते हुए कोई प्रशासनिक निर्णय लिया है तो उसमें हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश में DEO और BEO जैसे महत्वपूर्ण पदों पर प्रभारी नियुक्तियों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। माना जा रहा है कि अब जिलों में प्रशासनिक आवश्यकता और अधिकारियों की योग्यता के आधार पर जूनियर अधिकारियों को भी प्रभारी पदों की जिम्मेदारी दी जा सकेगी। शिक्षा विभाग में लंबे समय से प्रभारी पदों को लेकर वरिष्ठता और योग्यता के बीच विवाद सामने आते रहे हैं। कई अधिकारी वरिष्ठता के आधार पर पदों पर दावेदारी करते हैं, जबकि सरकार प्रशासनिक जरूरतों और कार्यक्षमता को देखते हुए नियुक्तियां करती है। हाईकोर्ट के इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रभारी पद किसी अधिकारी का अधिकार नहीं, बल्कि सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रशासनिक जिम्मेदारी है। ऐसे पदों पर नियुक्ति के लिए केवल सेवा अवधि या वरिष्ठता ही एकमात्र आधार नहीं हो सकती। बिलासपुर हाईकोर्ट के फैसले को शिक्षा विभाग में प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे प्रदेश के विभिन्न जिलों में लंबित प्रभारी DEO और BEO नियुक्तियों को लेकर भी रास्ता साफ होने की संभावना है।
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