डॉक्टर और उनके पिता पर धोखाधड़ी का केस, अग्रिम जमानत याचिका खारिज

छग

Update: 2025-06-19 18:00 GMT
Ambikapur. अंबिकापुर। शहर में बहुमूल्य जमीन को फर्जी वसीयत के जरिए हड़पने के मामले में कोतवाली पुलिस ने डा. वैभव जायसवाल और उनके पिता सुरेश जायसवाल के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और साजिश रचने के आरोप में गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। आरोपियों पर धारा 420, 467, 468 व 120बी के तहत मामला कायम किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डोंगरगढ़ निवासी गुरुशरण कक्कड़ ने शिकायत में बताया कि उनके दादा स्व. प्रीतम सिंह ने वर्ष 1959 में अंबिकापुर के भट्ठी रोड स्थित खसरा नंबर 1278/2 में 7 डिसमिल जमीन खरीदी थी। प्रीतम सिंह ने उस वक्त अपने परिचित गिरधारीलाल जायसवाल को जमीन की देखरेख के लिए मुख्तयारनामा सौंपा था। वर्षों बाद दस्तावेजों की पड़ताल में गुरुशरण को जमीन की रजिस्ट्री और मुख्तयारनामा मिले, जिसके बाद उन्होंने राजस्व रिकॉर्ड निकलवाया। जब पटवारी से जानकारी ली गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि उक्त भूमि अब डा. वैभव जायसवाल के नाम पर दर्ज है।


जांच में पाया गया कि 09 अगस्त 2007 को फर्जी वसीयत तैयार कर जमीन पहले सुरेश जायसवाल के नाम, फिर उनके बेटे डा. वैभव जायसवाल के नाम कराई गई। वसीयत में प्रीतम सिंह को निसंतान दर्शाया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि उनके दो पुत्र हैं। साथ ही, वसीयत पर हिंदी में हस्ताक्षर है, जबकि प्रीतम सिंह केवल पंजाबी में हस्ताक्षर करते थे, जिससे वसीयत की प्रमाणिकता संदिग्ध हो गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उन्होंने डा. वैभव जायसवाल से संपर्क किया, तो उन्हें धमकी देकर अंबिकापुर छोड़ने को कहा गया। इस जमीन पर वर्तमान में
सिद्धार्थ
हॉस्पिटल का निर्माण कराया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डा. वैभव जायसवाल ने जिला एवं सत्र न्यायालय अंबिकापुर में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। लेकिन न्यायाधीश ममता पटेल की अदालत ने इसे सुनियोजित आर्थिक षड्यंत्र मानते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी है। पुलिस अब मामले की गहन जांच में जुट गई है, और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। राजस्व विभाग के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। यदि और अनियमितताएं सामने आती हैं, तो अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
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