सर्च ऑपरेशन के दौरान महिला माओवादी कमांडर ढेर, हथियार और सामग्री बरामद

छग

Update: 2026-04-13 11:18 GMT
Kanker. कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ में एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने जानकारी दी कि छोटेबेठिया–परतापुर थाना क्षेत्र के सीमावर्ती इलाके माचपल्ली–आरामझोरा–हिडूर के जंगलों में माओवादियों की मौजूदगी की सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था। इसी दौरान सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच माचपल्ली क्षेत्र में मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ के बाद इलाके में की गई सर्चिंग में सुरक्षा बलों को एक
महिला माओवादी
का शव बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार मृत माओवादी कैडर की पहचान ACM रूपी के रूप में की गई है। वह संगठन में कमांडर स्तर की सक्रिय सदस्य थी और लंबे समय से बस्तर क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों में शामिल रही थी।


जानकारी के अनुसार, माओवादी रूपी, डीकेएसजेडसी सदस्य विजय रेड्डी की पत्नी थी। विजय रेड्डी की मौत वर्ष 2025 में जिला मानपुर–मोहला में हुई एक मुठभेड़ के बाद हुई थी, जिसमें उसका शव बरामद किया गया था। पुलिस का कहना है कि रूपी बस्तर क्षेत्र में सक्रिय अंतिम तेलुगू माओवादी कैडरों में से एक थी, जो संगठन की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थी। मुठभेड़ स्थल की तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों ने महिला माओवादी के शव के पास से एक पिस्टल, गोला-बारूद और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की है। इसके बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा सघन सर्च ऑपरेशन जारी रखा गया है ताकि किसी अन्य माओवादी की मौजूदगी का पता लगाया जा सके। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों की टीम ने इलाके को घेर लिया था और रणनीति के तहत सर्चिंग शुरू की गई थी। इसी दौरान माओवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने भी कार्रवाई की।

मुठभेड़ के बाद माओवादी जंगलों की ओर भाग निकले, जबकि एक महिला माओवादी का शव बरामद हुआ। पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने बताया कि क्षेत्र में स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। आसपास के जंगलों में अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह की संभावित गतिविधि पर नजर रखी जा सके। इस घटना के बाद बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पट्टलिंगम ने भी बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लगातार माओवादियों से आत्मसमर्पण और पुनर्वास की अपील की जा रही है। पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में माओवादी कैडर हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। आईजीपी ने कहा कि रूपी जैसे कुछ कैडरों ने आत्मसमर्पण का अवसर नहीं अपनाया और हिंसा के रास्ते पर बने रहे।

जिसका परिणाम इस तरह की घटनाओं के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई का उद्देश्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना और क्षेत्र में शांति स्थापित करना है। उन्होंने माओवादी संगठन से जुड़े अन्य सदस्यों से भी अपील की कि उनके पास अब सीमित समय है और वे हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट आएं। उन्होंने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, मुठभेड़ के बाद आसपास के गांवों में
सुरक्षा व्यवस्था
बढ़ा दी गई है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने के निर्देश दिए गए हैं। यह मुठभेड़ बस्तर क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चल रहे अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। सुरक्षा बलों का कहना है कि इलाके में लगातार सर्चिंग और ऑपरेशन जारी रहेगा ताकि क्षेत्र को पूरी तरह माओवादी प्रभाव से मुक्त किया जा सके। फिलहाल पूरे क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सुरक्षा बल सतर्क बने हुए हैं और अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।
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